दिल्ली

Sonam Wangchuk ने 26 दिन बाद खत्म किया अनशन, सरकार के लिखित आश्वासन के बाद केस वापसी और पेपर लीक पर बड़ा फैसला

जंतर-मंतर पर 26 दिनों का अनशन खत्म: सरकार के लिखित आश्वासन के बाद सोनम वांगचुक ने तोड़ी भूख हड़ताल, केस वापसी और पेपर लीक पर चर्चा का वादा

एडिटर चीफ मो रईस 

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर पिछले करीब एक महीने से जिस आंदोलन का केंद्र बना हुआ था, वहां से आखिरकार राहत भरी खबर आई है। लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक ने अपना 26 दिनों से चला आ रहा अनशन और भूख हड़ताल समाप्त कर दिया है। 23 जुलाई की देर रात केंद्रीय मंत्रियों द्वारा मांगों पर दिए गए ठोस लिखित आश्वासन (Written Assurance) के बाद वांगचुक ने अनशन तोड़ने का फैसला लिया।
अनशन की लंबी अवधि के दौरान सोनम वांगचुक की स्थिति भी बिगड़ी थी, जिसके चलते बीच में उन्हें अस्पताल में भी भर्ती कराना पड़ा था। लेकिन, मांगों पर अडिग वांगचुक और उनके समर्थकों का यह आंदोलन आखिरकार सरकार से लिखित सहमति पत्र हासिल करने में सफल रहा।

जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह से वार्ता के बाद बनी बात


23 जुलाई की देर शाम घटनाक्रम काफी तेजी से बदला। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने लेह एपेक्स बॉडी (LAB) के नेताओं के साथ उच्चस्तरीय मुलाकात की। इस वार्ता के दौरान सरकार ने आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों पर अपनी सहमति व्यक्त की और एक आधिकारिक लिखित आश्वासन सौंपा। इस आंदोलन की सबसे खास बात यह रही कि इसे व्यापक राजनीतिक और सामाजिक समर्थन मिला। 26 दिनों के इस अनशन के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने जंतर-मंतर पहुंचकर सोनम वांगचुक से मुलाकात की थी। सभी सांसदों ने हस्ताक्षर कर वांगचुक से सेहत का हवाला देते हुए अनशन समाप्त करने की भावुक अपील की थी।

सरकार ने लिखित दस्तावेज में दिए ये 3 बड़े आश्वासन
सरकार की ओर से सौंपे गए पत्र में तीन प्रमुख बिंदुओं पर स्पष्ट और लिखित प्रतिबद्धता जताई गई है:1.शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर से केस वापसी: सरकार ने स्पष्ट किया है कि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों और 20 जुलाई को आयोजित संसद मार्च में भाग लेने वाले सभी शांतिपूर्ण (गैर-हिंसक) प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कठोर या आपराधिक कार्रवाई नहीं होगी। जिन लोगों पर इस दौरान मामले दर्ज किए गए थे, उन्हें वापस लिया जाएगा।

2.संसद में पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली पर विस्तृत चर्चा:

देश भर के युवाओं और छात्रों से जुड़े ज्वलंत मुद्दे—पेपर लीक, राष्ट्रीय परीक्षा प्रणालियों की खामियों और इनमें स्थाई संस्थागत सुधारों पर संसद के आगामी सत्र में विस्तृत और गंभीर चर्चा कराई जाएगी।

3.पीड़ित छात्रों के परिवारों को मुआवजे पर सकारात्मक विचार

इतिहास में पहली बार सरकार ने लिखित दस्तावेज में स्वीकार किया है कि पेपर लीक और परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के कारण भारी मानसिक तनाव और जान गंवाने वाले छात्रों के पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देने पर सरकार पूरी तरह सकारात्मक रुख के साथ विचार करेगी।

प्रधानमंत्री मोदी का रुख: दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई, गठित हुई फास्ट ट्रैक कोर्ट


अनशन की समाप्ति के बीच देश की परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर सरकारी स्तर पर भी बड़े कदम उठाए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक मंच से पेपर लीक जैसी घटनाओं को युवाओं के भविष्य के साथ गंभीर अन्याय करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के अपराधों में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए प्रशासनिक और कानूनी ढांचे को गति दी गई है:
विशेष अदालतों का गठन: सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, धांधली और नकल के मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जा रहा है।
दिल्ली हाई कोर्ट की पहल: इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने पेपर लीक मुकदमों की तेजी से सुनवाई के लिए एक विशेष अदालत को नामित कर दिया है, ताकि आरोपियों को जल्द से जल्द सजा दिलाई जा सके।

प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल: उच्च शिक्षा सचिव बदले गए


इस पूरे घटनाक्रम और देश भर में परीक्षा प्रणाली को लेकर उठे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर भी अहम बदलाव किए हैं। शिक्षा मंत्रालय में उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी का तबादला कर दिया गया है। उनकी जगह वरिष्ठ अधिकारी नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा सचिव की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। हालाँकि, सरकारी सूत्रों और आधिकारिक बयानों में इसे एक सामान्य और नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इस फेरबदल का उद्देश्य शिक्षा विभाग में प्रशासनिक मुस्तैदी और नया दृष्टिकोण लाना है।

सोनम वांगचुक का संदेश: आंदोलन का अंत नहीं, बल्कि संवाद की शुरुआत


अनशन समाप्त करने के बाद सोनम वांगचुक ने अपने समर्थकों और देश के युवाओं के नाम एक बेहद महत्वपूर्ण संदेश जारी किया। वांगचुक ने छात्रों और युवाओं से अपील की कि वे इस आंदोलन को पूरी तरह अनुशासित, मर्यादित और शांतिपूर्ण बनाए रखें। उन्होंने कहा कि किसी भी उकसावे के बावजूद हिंसा का रास्ता नहीं चुनना है, क्योंकि सत्याग्रह की असली ताकत शांति और धैर्य में ही निहित होती है।
आंदोलन के भविष्य पर बात करते हुए वांगचुक के प्रतिनिधियों ने साफ किया कि अनशन जरूर खत्म हो गया है, लेकिन युवाओं और लद्दाख के अधिकारों की लड़ाई का अंत नहीं हुआ है। CJP के प्रतिनिधियों और केंद्रीय मंत्रालयों के बीच मांगों के क्रियान्वयन को लेकर बैठकों का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
सोनम वांगचुक के इस 26 दिवसीय अनशन ने न केवल लद्दाख की चिंताओं बल्कि देश के करोड़ों छात्रों और प्रतियोगी परीक्षार्थियों की आवाज को सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुंचाने का काम किया है। अब हर किसी की निगाहें सरकार द्वारा दिए गए लिखित आश्वासनों के क्रियान्वयन और संसद में होने वाली संभावित चर्चा पर टिकी हुई हैं।

 

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