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राम मंदिर चढ़ावा गबन केस चंपत राय के कथित ड्राइवर सहित सभी 8 आरोपी न्यायिक हिरासत में; 79.85 लाख बरामद, बैंक अधिकारी भी SIT के रडार पर

राम मंदिर चढ़ावा गबन केस चंपत राय के कथित ड्राइवर सहित सभी 8 आरोपी न्यायिक हिरासत में; 79.85 लाख बरामद, बैंक अधिकारी भी SIT के रडार पर

विशेष रिमांड मजिस्ट्रेट की अदालत ने 29 जून तक जेल भेजा, कस्टोडियल रिमांड के लिए दोबारा अर्जी दे सकती है पुलिस

विशेष संवाददाता, अयोध्या
राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के नकद और कीमती चढ़ावे में हुए करोड़ों रुपये के कथित गबन मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को अदालत ने 29 जून तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। मुहर्रम के अवकाश के चलते आरोपियों को विशेष रिमांड मजिस्ट्रेट निवेदिता सिंह की अदालत में पेश किया गया। हालांकि, पुलिस ने इस पेशी के दौरान आरोपियों की कस्टोडियल रिमांड नहीं मांगी, लेकिन माना जा रहा है कि 29 जून को नियमित अदालत खुलने पर पुलिस इन आरोपियों को पूछताछ के लिए रिमांड पर लेने की अर्जी दाखिल कर सकती है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस हाई-प्रोफाइल घोटाले में अब तक 79.85 लाख रुपये की रिकॉर्ड बरामदगी की जा चुकी है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) और अयोध्या पुलिस की संयुक्त टीमें पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं।

ट्रस्ट से लेकर बैंक तक फैला नेटवर्क, चंपत राय का इस्तीफा
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और सनसनीखेज मोड़ तब आया जब गिरफ्तार आरोपियों में शामिल रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का निजी ड्राइवर बताया गया। इस खुलासे और चौतरफा दबाव के बाद चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिसने इस मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।
इसके अलावा, गिरफ्तार आरोपियों में शामिल सुभाष श्रीवास्तव एक सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) बैंककर्मी है। जांच एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान इस गबन में बैंक के कुछ मौजूदा अधिकारियों की संलिप्तता के भी पुख्ता संकेत मिले हैं। एसआईटी को जांच के दौरान कई संदिग्ध बैंक अधिकारियों के नाम मिले हैं, जिनकी भूमिका की गहराई से जांच की जा रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ बड़े बैंक अधिकारियों पर भी कानून का शिकंजा कस सकता है।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज
उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपी गई एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और लोकसेवकों द्वारा आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust) से जुड़ी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।

गिरफ्तार आरोपियों की सूची
अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव (रिटायर्ड बैंककर्मी) और रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव।

साजिश की तह तक जाने में जुटी एजेंसियां
जांच अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक सामान्य चोरी या गबन का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित बड़ी साजिश काम कर रही थी। देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था और उनके द्वारा चढ़ाए गए गुप्त दान व कीमती सामान को गायब करने के लिए एक पूरा सिंडिकेट सक्रिय था। फिलहाल, पुलिस और एसआईटी की संयुक्त टीमें बरामद रकम के स्रोतों और इस रैकेट के मुख्य मास्टरमाइंड तक पहुँचने के लिए कड़ियां जोड़ रही हैं। 29 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।

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