भरत तिवारी एनकाउंटर केस में चौतरफा घिरी सरकार: प्रशांत किशोर का बड़ा ऐलान, न्याय नहीं मिला तो 15 दिन बाद होगा मुख्यमंत्री आवास का महाघेराव

भरत तिवारी एनकाउंटर केस में चौतरफा घिरी सरकार: प्रशांत किशोर का बड़ा ऐलान, न्याय नहीं मिला तो 15 दिन बाद होगा मुख्यमंत्री आवास का महाघेरा

भोजपुर के बिलौटी गांव में जुटी भारी महापंचायत; सिटिंग जज की निगरानी में न्यायिक जांच की मांग पर अड़े परिजन, फर्जी एनकाउंटर के आरोपों से गरमाई बिहार की सियासत।
विशेष संवाददाता, आरा (भोजपुर)/पटना | 25 जून, 2026
आरा/पटना बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में 17 जून को हुए 28 वर्षीय युवा भरत तिवारी के कथित एनकाउंटर मामले ने अब एक भीषण राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन का रूप ले लिया है। इस संवेदनशील और सनसनीखेज वारदात को लेकर पूरे प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बुधवार को बिलौटी गांव में आयोजित एक विशाल महापंचायत में हजारों की संख्या में पहुंचे लोगों के बीच जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर ने नीतीश-सम्राट सरकार के खिलाफ सीधे तौर पर आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बनाते हुए प्रशांत किशोर ने स्पष्ट शब्दों में 15 दिनों का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा के भीतर इस कथित फर्जी एनकाउंटर के पीछे जिम्मेदार उच्च अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो पटना में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास का पूर्ण रूप से घेराव किया जाएगा।
इस पूरे मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विपक्षी खेमे और सामाजिक संगठनों ने पुलिसिया थ्योरी पर गंभीर आपत्ति जताई है। महापंचायत को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने राज्य सरकार की मंशा पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि भरत तिवारी कोई अपराधी या मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति नहीं थे, बल्कि वे समाज के एक जागरूक और सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता थे। पुलिस प्रशासन द्वारा उन्हें अपराधी की तरह एनकाउंटर में मार गिराना सीधे तौर पर सत्ता और खाकी के गठजोड़ की एक खौफनाक वारदात की ओर इशारा करता है। प्रशांत किशोर ने मांग उठाई है कि इस पूरे घटनाक्रम की जांच किसी भी रिटायर्ड अधिकारी या प्रशासनिक कमेटी से न कराकर, पटना हाई कोर्ट के वर्तमान (सिटिंग) जज की प्रत्यक्ष निगरानी में एक उच्च स्तरीय न्यायिक कमेटी से कराई जाए। उनका आरोप है कि बिना न्यायिक जांच के इस एनकाउंटर के पीछे छिपे असली चेहरों और साजिशकर्ता उच्च पुलिस अधिकारियों की भूमिका को कभी भी सामने नहीं लाया जा सकेगा।

भरत तिवारी कोई मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्ति या अपराधी नहीं थे, वे एक समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता थे। पुलिस ने जिस बर्बरता से इस वारदात को अंजाम दिया है, वह पूरी तरह से एक फर्जी एनकाउंटर की कहानी बयां करता है। अगर 15 दिनों के भीतर इस मामले में सिटिंग जज की निगरानी में निष्पक्ष न्यायिक जांच शुरू नहीं की गई और दोषी अधिकारियों को नहीं नापा गया, तो जन सुराज और बिहार की जनता चुप नहीं बैठेगी। हम सीधे राजधानी पटना कूच करेंगे और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास का ऐतिहासिक घेराव कर लोकतांत्रिक तरीके से सरकार की ईंट से ईंट बजा देंगे।”
प्रशांत किशोर (प्रमुख, जन सुराज)
दूसरी तरफ, मामले के लगातार तूल पकड़ने और चौतरफा दबाव के बाद बिहार सरकार पूरी तरह से बैकफुट पर नजर आ रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय और गृह विभाग की ओर से इस मामले में मचे भारी राजनीतिक घमासान को शांत करने के लिए एक हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) जज की निगरानी में जांच कराने के आदेश जारी किए गए हैं। हालांकि, पीड़ित परिवार और आंदोलनकारी इस सरकारी कदम से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि रिटायर्ड जज की जांच के जरिए प्रशासन मामले को ठंडे बस्ते में डालने और दोषी बड़े अफसरों को बचाने की कोशिश कर रहा है।
मामले पर सरकार का बचाव करते हुए जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के कद्दावर नेता और कैबिनेट मंत्री श्रवण कुमार ने विपक्ष पर कड़ा हमला बोला है। श्रवण कुमार ने अपने बयान में कहा कि सरकार मामले को लेकर पूरी तरह से गंभीर है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने तीखा तंज कसते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दल और नेता एक दुखद घटना पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने की कोशिश कर रहे हैं और मामले का जबरन राजनीतिकरण कर कानून व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं।
भरत तिवारी एनकाउंटर कांड क्या हैं प्रमुख घटनाक्रम? वारदात की तारीख व स्थान 17 जून को भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में 28 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता भरत तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में मौत हुई।
फर्जी एनकाउंटर का संगीन आरोप परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि पुलिस ने सुनियोजित तरीके से भरत तिवारी की हत्या की है और इसे एनकाउंटर का रूप दिया।
सिटिंग जज से जांच की मांग जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर ने रिटायर्ड जज की जांच के सरकारी आदेश को खारिज करते हुए सिटिंग जज की निगरानी में न्यायिक जांच की मांग रखी है।
15 दिनों का कड़ा अल्टीमेटम दोषियों पर तत्काल बड़ी कार्रवाई न होने की स्थिति में पटना में मुख्यमंत्री आवास को चारों तरफ से घेरने की दी गई चेतावनी।
सियासी सरगर्मी तेज जेडीयू और विपक्ष के बीच इस घटना को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी, पूरे भोजपुर क्षेत्र में भारी आक्रोश का माहौल।
इस पूरे मामले ने अब बिहार की राजनीति में एक नया उबाल ला दिया है। एक ओर जहाँ पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगाते हुए अपनी जान के खतरे और पुलिसिया दमन की बात कह रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रशांत किशोर द्वारा महापंचायत के माध्यम से सीधे मुख्यमंत्री आवास के घेराव के अल्टीमेटम ने शासन-प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए हैं। स्थानीय खुफिया तंत्र (एलआईयू) भी इस मामले को लेकर अलर्ट पर है, क्योंकि बिलौटी गांव में हुई महापंचायत के बाद से ही भोजपुर और आस-पास के जिलों में जनता के बीच आक्रोश चरम पर है।
आने वाले 15 दिन बिहार की राजनीति और नीतीश-सम्राट सरकार के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार आंदोलनकारियों की सिटिंग जज से जांच कराने की मांग के आगे झुकती है, या फिर बिहार की सड़कों पर एक बार फिर बड़े जनांदोलन और सरकार के बीच सीधी भिड़ंत देखने को मिलेगी। इस सनसनीखेज एनकाउंटर के पीछे का असली सच क्या है, यह तो एक निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच के बाद ही साफ हो पाएगा, लेकिन फिलहाल इस वारदात ने बिहार की सत्ता को हिला कर रख दिया है।
