सपा के वरिष्ठ विधायक आलमबदी आजमी का 92 वर्ष की उम्र में निधन, आजमगढ़ में शोक की लहर
समाजवादी पार्टी के सबसे बुजुर्ग विधायक आलमबदी आजमी का 92 वर्ष की उम्र में निधन, आजमगढ़ की निजामाबाद सीट से 5 बार रहे एमएलए

एडिटर चीफ मो, रईस
आजमगढ़: उत्तर प्रदेश की राजनीति और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठतम नेताओं में शुमार निजामाबाद विधानसभा सीट से 5 बार के विधायक आलमबदी आजमी का बुधवार को निधन हो गया। 92 वर्ष की उम्र में उन्होंने आजमगढ़ स्थित अपने शहर के कुर्मी टोला आवास पर अंतिम सांस ली। आलमबदी आजमी लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। इस साल अप्रैल में तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भी भर्ती कराया गया था। उनके निधन की खबर से न सिर्फ आजमगढ़ बल्कि पूरे प्रदेश के राजनीतिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई है।
वे अपने पीछे 6 बच्चों से भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। परिजनों द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, बुधवार शाम 4 बजे आजमगढ़ स्थित मशहूर मदरसे जामियातुर रशाद में जनाजे की नमाज अदा की जाएगी, जिसके बाद उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
सादगी, ईमानदारी और जनसेवा के मिसाल थे आलमबदी

उत्तर प्रदेश विधानसभा के सबसे उम्रदराज विधायकों में गिने जाने वाले आलमबदी आजमी अपनी बेदाग छवि, सादगी और जनता से सीधे जुड़ाव के लिए जाने जाते थे। जहां आज की राजनीति में चकाचौंध और भारी-भरकम गाड़ियों का दौर है, वहीं आलमबदी आजमी एक ऐसे नेता थे जो सादा जीवन और उच्च विचार के सिद्धांत पर जिंदगी भर चले।
आजमगढ़ की राजनीति में उनका दबदबा ऐसा था कि निजामाबाद क्षेत्र की जनता ने उन पर बार-बार अपना भरोसा जताया। अपने लंबे राजनीतिक करियर के दौरान उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए कई काम किए। निजामाबाद सीट पर उनके और उनके मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी अंगद यादव के बीच कई बार सियासी मुकाबला देखने को मिला, जिसमें आलमबदी ने कई बार ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
प्रारंभिक जीवन से लेकर इंजीनियरिंग और राजनीति तक का सफर

आलमबदी आजमी का जन्म 16 मार्च 1936 को आजमगढ़ में ही हुआ था। बचपन से ही मेधावी रहे आलमबदी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद गोरखपुर के इस्लामिया कॉलेज से वर्ष 1953 में 12वीं की परीक्षा पास की। पढ़ाई के प्रति उनके जुनून का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 1950 के दशक में ही तकनीकी शिक्षा हासिल कर ली थी। वर्ष 1956 में उन्होंने टेक्निकल इंस्टीट्यूट, गोरखपुर से इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा की डिग्री हासिल की थी। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने समाज सेवा का रास्ता चुना और धीरे-धीरे जनसेवा करते हुए राजनीति के मैदान में उतर आए। 1996 से लेकर 2007 तक और फिर उसके बाद भी वे निजामाबाद विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे और कुल 5 बार विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे।
पार्टी और क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति: अखिलेश यादव

आलमबदी आजमी के इंतकाल की खबर सामने आते ही समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर श्रद्धांजलि देते हुए लिखा:
निज़ामाबाद विधानसभा से लोकप्रिय विधायक जनाब आलम बदी साहब का इंतकाल अत्यंत दुखद! दिवंगत आत्मा को शांति दें भगवान। अखिलेश यादव के अलावा पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं, सांसदों और विधायकों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।
इकरा हसन और आदित्य यादव ने दी भावभंगुर श्रद्धांजलि
कैराना से सपा सांसद इकरा हसन ने आलमबदी आजमी के निधन पर दुख जताते हुए कहा:
उनका जाना मिल्लत, समाज और सियासत के लिए एक बड़ा ख़सारा (अपूरणीय नुकसान) है। उनकी ख़िदमात (सेवाओं) और ख़ुलूस (मोहब्बत) को हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने पूरी जिंदगी जनता के हक की लड़ाई लड़ी। वहीं सपा सांसद आदित्य यादव ने भी गहरा शोक प्रकट किया। उन्होंने कहा कि आलमबदी साहब का जाना केवल समाजवादी पार्टी के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण आजमगढ़ और उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए एक बड़ा घाटा है। वे नए नेताओं के लिए हमेशा एक मार्गदर्शक और अभिभावक की तरह रहे।
समर्थकों और क्षेत्र में छाया मातम
आलमबदी आजमी के निधन की सूचना मिलते ही उनके कुर्मी टोला स्थित निवास पर अंतिम दर्शनों के लिए समर्थकों, स्थानीय निवासियों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का तांता लग गया। हर कोई अपने चहेते और सादगी पसंद नेता को अंतिम विदाई देने पहुंच रहा है। आजमगढ़ में उनके समर्थकों का कहना है कि आलमबदी साहब जैसे जमीन से जुड़े नेता का जाना क्षेत्र के लिए एक ऐसा खालीपन छोड़ गया है, जिसकी भरपाई होना नामुमकिन है।
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