सोनम वांगचुक का बड़ा ऐलान: सफदरजंग अस्पताल से अनशन तोड़ने के लिए सरकार के सामने रखीं 3 बड़ी शर्तें
सफदरजंग अस्पताल में नजरबंद सोनम वांगचुक का बड़ा ऐलान, अनशन तोड़ने के लिए सरकार के सामने रखीं तीन सख्त शर्तें

संपादक रजनी शर्मा
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही देश की राजधानी दिल्ली में सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। एक तरफ जहां संसद के भीतर विपक्ष सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से लेकर जंतर-मंतर तक एक ऐसा आंदोलन सुलग रहा है जिसने हुक्मरानों की नींद उड़ा दी है। देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और लगातार हो रहे पेपर लीक के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अब अस्पताल के भीतर से ही सरकार के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है।
सफदरजंग अस्पताल के बेड से जारी अपने एक कड़े संदेश में सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने के लिए तीन बेहद गंभीर और बड़ी शर्तें रख दी हैं। वांगचुक ने साफ कर दिया है कि जब तक इन मांगों को पूरा नहीं किया जाता, उनका यह सत्याग्रह रुकने वाला नहीं है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को दोहराते हुए कहा है कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों और नेताओं की जवाबदेही तय होनी ही चाहिए।
अस्पताल से जारी संदेश में क्या हैं वो तीन शर्तें?

सोनम वांगचुक और ‘सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस’ (CJP) के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन को दबाने की कोशिशों के बीच, वांगचुक ने साफ किया है कि वे झुकने वाले नहीं हैं। अस्पताल से जारी अपनी पहली शर्त में उन्होंने कहा है कि सरकार को सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार करना होगा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़ी खामियां हैं और हाल ही में हुए पेपर लीक के मामलों में प्रशासन पूरी तरह नाकाम रहा है। जब तक सरकार सार्वजनिक मंच से अपनी इस नाकामी की जिम्मेदारी नहीं लेती, तब तक गतिरोध खत्म नहीं होगा।
उनकी दूसरी और सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि उन्हें और CJP के शीर्ष नेतृत्व को जंतर-मंतर से संसद भवन तक शांतिपूर्ण मार्च करने की इजाजत दी जाए। वांगचुक चाहते हैं कि विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद खुद आकर उनसे मुलाकात करें और यह लिखित या सार्वजनिक भरोसा दें कि देश की शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य से जुड़ा यह संवेदनशील मुद्दा संसद के पटल पर पूरी गंभीरता के साथ उठाया जाएगा।
अपनी तीसरी शर्त में वांगचुक ने अपने गिरते स्वास्थ्य का हवाला देते हुए कहा है कि अगर मेडिकल कारणों या कमजोरी की वजह से वे खुद संसद भवन तक जाने की स्थिति में नहीं रहते हैं, तो देश के विभिन्न दलों के सांसदों को खुद सफदरजंग अस्पताल आकर उन्हें यह आश्वासन देना होगा। इन तीन शर्तों के सामने आने के बाद अब गेंद पूरी तरह से सरकार और प्रशासन के पाले में चली गई है।
नजरबंदी के संगीन आरोप और पुलिस का दावा

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब सोनम वांगचुक ने प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। अस्पताल के वार्ड से बाहर आए संदेशों के मुताबिक, वांगचुक ने आरोप लगाया है कि उन्हें इलाज के नाम पर सफदरजंग अस्पताल में गैर-कानूनी तरीके से नजरबंद कर दिया गया है। उनके कमरे के बाहर कड़ा पहरा है, और उन्हें किसी भी बाहरी व्यक्ति, मीडिया या अपने सहयोगियों से स्वतंत्र रूप से बातचीत करने की इजाजत नहीं दी जा रही है। वांगचुक के समर्थकों का कहना है कि यह उनकी आवाज को दबाने की एक सोची-समझी प्रशासनिक साजिश है।
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस और सरकारी महकमे ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कोर्ट के पुराने दिशा-निर्देशों और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए ही आंदोलनकारियों को संसद की तरफ बढ़ने से रोका गया था। पुलिस का दावा है कि वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ रही थी, जिसे देखते हुए डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें सुरक्षात्मक कारणों से अस्पताल में भर्ती कराया गया है, न कि उन्हें गिरफ्तार या नजरबंद किया गया है। पुलिस ने सुरक्षा और खुफिया इनपुट्स का हवाला देते हुए आंदोलनकारियों को संसद मार्च निकालने की अनुमति देने से साफ मना कर दिया है।
छावनी में तब्दील हुई दिल्ली, जंतर-मंतर पर भारी तनाव

मानसून सत्र के पहले ही दिन दिल्ली के दिल कहे जाने वाले लुटियंस जोन और नई दिल्ली इलाके में सुरक्षा के ऐसे इंतजाम देखे जा रहे हैं, मानो कोई आपातकाल की स्थिति हो। जंतर-मंतर, जहां सोनम वांगचुक के समर्थक और CJP के कार्यकर्ता डेरा डाले हुए हैं, उसे चारों तरफ से लोहे की ऊंची बैरिकेडिंग से सील कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ-साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और अर्धसैनिक बलों की कई कंपनियों को तैनात किया गया है, ताकि प्रदर्शनकारी किसी भी हाल में संसद की तरफ कूच न कर सकें।
इस प्रशासनिक घेराबंदी के बावजूद आंदोलनकारियों के हौसले पस्त होते नहीं दिख रहे हैं। सोनम वांगचुक की पत्नी और CJP के प्रमुख नेताओं ने जंतर-मंतर पर मौजूद युवाओं और प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि वे किसी भी दवाब के आगे न झुकें और अपने शांतिपूर्ण मार्च के आह्वान पर अडिग रहें। इस अपील के बाद से जंतर-मंतर पर माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है। रुक-रुक कर सरकार विरोधी नारेबाजी हो रही है और प्रदर्शनकारी हर बैरिकेड को पार करने के लिए आमादा दिख रहे हैं।
यह लड़ाई अब सिर्फ एक अनशन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसने देश के करोड़ों छात्रों और बेरोजगार युवाओं की उस नब्ज को छू लिया है जो पिछले कई महीनों से पेपर लीक के दंश को झेल रहे हैं। देखने वाली बात यह होगी कि क्या मानसून सत्र के हंगामे के बीच सरकार सोनम वांगचुक की शर्तों के आगे झुकती है, या फिर दिल्ली की सड़कों पर शुरू हुआ यह संग्राम कोई नया मोड़ लेता है।
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