गाजीपुर में अनूठा जन्मदिन: 20 बीघे मक्के के खेत में उकेरा अखिलेश यादव का चेहरा, वीडियो वायरल
20 बीघे में महीनों की कड़ी मेहनत से तैयार हुआ पूर्व मुख्यमंत्री का चेहरा; भावुक होकर अखिलेश यादव ने की वर्चुअल बातचीत, सरकार बनने पर किया ऐतिहासिक नीतियों का वादा


गाजीपुर/लखनऊ, ब्यूरो राजकुमार निषाद।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के जन्मदिन के अवसर पर सूबे में कई रंग देखने को मिले, लेकिन पूर्वी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से आई एक असाधारण तस्वीर ने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। गाजीपुर के एक सुदूर गांव में स्थानीय किसानों और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अपनी अटूट निष्ठा और अनूठी रचनात्मकता का परिचय देते हुए, 20 बीघे में लहलहाती मक्के की फसल को बेहद सलीके से काटकर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की एक विशालकाय और जीवंत आकृति (पोर्ट्रेट) तैयार की है। आसमान से ली गई इस कलाकृति की विहंगम तस्वीरें और वीडियो इंटरनेट मीडिया पर आते ही सनसनी की तरह फैल गए हैं और राजनीतिक गलियारों सहित आम जनता के बीच भारी कौतूहल का विषय बने हुए हैं।

इस अभूतपूर्व और अनोखे उपहार की परिकल्पना लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिषेक यादव द्वारा तैयार की गई थी। इस भगीरथ प्रयास को धरातल पर उतारने के लिए उन्होंने स्थानीय स्तर पर दर्जनों खेतिहर किसानों और पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट किया। इस कलाकृति को अंतिम रूप देना कोई आसान काम नहीं था। इसके लिए किसानों ने तपती धूप और अनिश्चित मौसम के बीच महीनों तक दिन-रात एक कर दिया। फसल के एक-एक पौधे को नाप-जोखकर तराशना, सही अनुपात में खुदाई करना और जंगली जानवरों से उसकी चौबीसों घंटे रखवाली करना एक बेहद जटिल कार्य था। किसानों की इस अनथक साधना का ही परिणाम है कि आज 20 बीघे के विशाल भूभाग पर अखिलेश यादव का मुस्कुराता हुआ चेहरा पूरी तरह सजीव नजर आ रहा है, जो ग्रामीण भारत की अद्भुत कलात्मक क्षमता को दर्शाता है।
जब इस अनूठे जन्मदिन के तोहफे और इसके पीछे छिपी किसानों की अथक मेहनत की जानकारी लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी के राज्य मुख्यालय तक पहुंची, तो खुद अखिलेश यादव भी भावुक हो उठे। उन्होंने बिना देर किए गाजीपुर के उन पसीना बहाने वाले किसानों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वर्चुअल संवाद) के जरिए सीधी बातचीत की। संवाद के दौरान सपा प्रमुख ने प्रत्येक किसान का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जमीन से जुड़े इन अन्नदाताओं ने उनके जन्मदिन को हमेशा-हमेशा के लिए यादगार बना दिया है।

किसानों से मुखातिब होते हुए अखिलेश यादव ने एक बड़ा राजनीतिक वादा भी किया। उन्होंने खुद को धरती पुत्र’ श्रद्धेय मुलायम सिंह यादव का बेटा बताते हुए कहा मैं किसानों के दर्द और उनकी मेहनत को भली-भांति समझता हूँ। उत्तर प्रदेश की मिट्टी और यहाँ के अन्नदाताओं ने मुझे जो सम्मान दिया है, उसका कर्ज मैं नीतियों के माध्यम से चुकाऊँगा। सूबे में समाजवादी पार्टी की सरकार बनते ही किसानों के हित में ऐसे ऐतिहासिक और बड़े फैसले लिए जाएंगे, जिससे हर खेत लहलहाएगा और हर किसान के चेहरे पर सच्ची मुस्कान लौटेगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि उनकी आगामी सरकार कृषि लागत को कम करने और फसलों के वाजिब दाम सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगी।

गाजीपुर में केवल मक्के के खेत की कलाकृति ही आकर्षण का केंद्र नहीं रही, बल्कि एक अन्य समर्पित प्रशंसक धागों और सुइयों की महीन कारीगरी से बनी अखिलेश यादव की एक अत्यंत सुंदर तस्वीर लेकर पहुंचा था, जिसकी प्रशंसा हर तरफ हो रही है। इसके साथ ही, पूरे उत्तर प्रदेश में पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा व्यापक स्तर पर जश्न मनाया गया। राजधानी लखनऊ सहित सभी जिलों में सुबह से ही उत्सव का माहौल रहा। राज्यभर में कार्यकर्ताओं ने मंदिरों में हवन-पूजन कर अपने नेता की दीर्घायु की कामना की, अस्पतालों में मरीजों को फल बांटे और गरीब बस्तियों में बड़े पैमाने पर भंडारे आयोजित किए। कई जगहों पर केक काटने के साथ-साथ जरूरतमंदों और छात्रों के बीच साइकिलों का वितरण भी किया गया।
बहरहाल, गाजीपुर के मक्के के खेत से उपजी यह हरी-भरी कलाकृति इस साल के राजनीतिक घटनाक्रमों में सबसे अनूठी और मानवीय संवेदनाओं से भरपूर मानी जा रही है, जिसने यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण अंचलों में आज भी नेताओं और जनता के बीच का जुड़ाव बेहद गहरा और रचनात्मक रूप ले सकता है।
