यशस्वी जायसवाल के शानदार आंकड़ों के बावजूद नहीं बन रही जगह, 6 मैचों में 2 शतक और 71.25 औसत के बाद भी 2027 वर्ल्ड कप पर सवाल
यशस्वी जायसवाल ने सिर्फ 6 वनडे मैचों में 285 रन और 2 शतक लगाए हैं। 71.25 का शानदार औसत होने के बावजूद उनकी प्लेइंग-11 में जगह स्थायी नहीं है। 2027 वर्ल्ड कप से पहले टीम इंडिया के सामने बड़ा सवाल।

स्पोर्ट्स न्यूज: भारतीय क्रिकेट में जब भी किसी युवा बल्लेबाज़ की बात होती है, तो यशस्वी जायसवाल का नाम सबसे आगे दिखाई देता है। टेस्ट और टी20 फॉर्मेट में अपनी आक्रामक बल्लेबाज़ी से छाप छोड़ने वाले 25 वर्षीय यशस्वी को लेकर अब 50 ओवर के प्रारूप यानी वनडे में एक नई बहस छिड़ गई है। साल 2027 के वनडे वर्ल्ड कप की तैयारियों की रूपरेखा जैसे-जैसे तैयार हो रही है, सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इतने बेहतरीन प्रदर्शन के बाद भी यशस्वी वनडे की प्लेइंग-इलेवन में अपनी जगह पक्की क्यों नहीं कर पा रहे हैं?
आंकड़े गवाह हैं कि जब-जब उन्हें सफेद गेंद के इस फॉर्मेट में मौका मिला, उन्होंने खुद को साबित किया। लेकिन जब टीम के सीनियर खिलाड़ी वापसी करते हैं, तो यशस्वी को बेंच पर बैठना पड़ता है। अब पूर्व क्रिकेटरों और जानकारों का मानना है कि विश्व कप जैसी बड़ी प्रतियोगिता से ठीक पहले किसी खिलाड़ी को सीधे मैदान में उतारने के बजाय, उसे अभी से लगातार मौके देना टीम के भविष्य के लिए ज्यादा सुरक्षित रणनीति होगी।
6 मैचों का ऐसा सफर, जो किसी भी ओपनर का सपना हो सकता है

साल 2025 में वनडे क्रिकेट में कदम रखने वाले यशस्वी जायसवाल का अब तक का रिकॉर्ड बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने भारत के लिए अब तक केवल 6 वनडे मुकाबले खेले हैं। इन 6 मुकाबलों में उन्होंने 71.25 की शानदार औसत के साथ 285 रन बनाए हैं।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि महज़ 6 मैचों के भीतर यशस्वी के बल्ले से 2 शतक निकल चुके हैं, जिसमें उनका सर्वोच्च स्कोर नाबाद 116 रन रहा है। किसी भी युवा बल्लेबाज़ के लिए अपने अंतरराष्ट्रीय वनडे करियर के शुरुआती दौर में 70 से ज्यादा का औसत और दो सेंचुरी जड़ना आसान नहीं होता। यह प्रदर्शन साफ दिखाता है कि उनके पास बड़ी पारियां खेलने का हुनर और धैर्य दोनों मौजूद हैं।
जब सीनियर लौटे तो बाहर हुए यशस्वी: अफगानिस्तान सीरीज के बाद का समीकरण
यशस्वी के साथ सबसे बड़ी चुनौती फॉर्म की नहीं, बल्कि टीम के मौजूदा ढांचे की रही है। हाल ही में जब भारत ने अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज खेली, तो यशस्वी को मैदान पर उतरने का मौका मिला और उन्होंने अपना काम बखूबी किया। लेकिन जैसे ही विराट कोहली जैसे दिग्गज खिलाड़ी की टीम में वापसी हुई, टीम संतुलन और सीनियरिटी के चलते यशस्वी को एक बार फिर अंतिम एकादश से बाहर बैठना पड़ा।
यह स्थिति टीम मैनेजमेंट के लिए भी आसान नहीं है। कप्तान रोहित शर्मा और शुभमन गिल की जोड़ी ने लंबे समय से भारत के लिए ओपनिंग की जिम्मेदारी संभाली है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर टॉप ऑर्डर पहले से भरा हुआ है, तो बेहतरीन फॉर्म में चल रहे इन-फॉर्म खिलाड़ी को जगह कैसे दी जाए?
पूर्व क्रिकेटर दीप दासगुप्ता ने दी अहम सलाह: “ऐन वक्त पर प्रयोग जोखिम भरा होगा

इस पूरे मामले पर पूर्व भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज़ दीप दासगुप्ता की राय काफी अहम मानी जा रही है। दीप दासगुप्ता का स्पष्ट मानना है कि अगर भारतीय टीम 2027 के वनडे वर्ल्ड कप की योजना बना रही है, तो यशस्वी जायसवाल को अभी से पर्याप्त वनडे मुकाबले खिलाए जाने चाहिए।
दासगुप्ता के अनुसार, टीम मैनेजमेंट को पुरानी गलतियों से सीख लेनी होगी। अक्सर देखा गया है कि बड़े आईसीसी टूर्नामेंट से कुछ महीने पहले नए खिलाड़ियों को आजमाया जाता है, और जब दबाव के पलों में अनुभव की कमी खलती है तो उसका नुकसान पूरी टीम को उठाना पड़ता है। अगर यशस्वी भविष्य की योजनाओं का हिस्सा हैं, तो उन्हें घर और विदेश दोनों परिस्थितियों में खेलने का पूरा अभ्यास मिलना चाहिए। उन्हें सिर्फ स्टैंडबाय या बैकअप के तौर पर रखने के बजाय लगातार मैचों के जरिए तैयार करना होगा।
रोहित शर्मा के बाद का भविष्य: क्या गिल नंबर-3 पर खेल सकते हैं?

क्रिकेट जगत इस हकीकत से भी वाकिफ है कि कप्तान रोहित शर्मा अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के अंतिम पड़ाव पर हैं। ऐसे में 2027 विश्व कप तक भारतीय ओपनिंग की तस्वीर क्या होगी, इस पर मंथन शुरू हो चुका है।
क्रिकेट गलियारों में एक विकल्प यह भी चर्चा में है कि क्या भविष्य में यशस्वी जायसवाल और रोहित शर्मा ओपनिंग करें और शुभमन गिल को नंबर-3 पर उतारा जाए? या फिर रोहित के बाद यशस्वी और गिल की जोड़ी स्थायी तौर पर पारी की शुरुआत संभाले? गिल तकनीकी रूप से बेहद सक्षम बल्लेबाज़ हैं और नंबर-3 पर पारी को संवारने की भूमिका वह बखूबी निभा सकते हैं। हालांकि, गिल और रोहित की मौजूदा ओपनिंग जोड़ी को तोड़ना टीम के लिए आसान फैसला नहीं होगा।
2027 की राह: मैनेजमेंट के सामने कड़ा इम्तिहान

2027 वनडे वर्ल्ड कप अभी दूर जरूर दिखता है, लेकिन एक मजबूत और स्थिर टीम बनाने के लिए दो साल का वक्त बहुत ज्यादा नहीं होता। यशस्वी जायसवाल के आंकड़े चीख-चीख कर कह रहे हैं कि वह सफेद गेंद की क्रिकेट में लंबी रेस के घोड़े हैं।
अब सारा दारोमदार भारतीय टीम प्रबंधन और चयनकर्ताओं पर है। क्या वे यशस्वी को समय-समय पर सिर्फ बैकअप के तौर पर खिलाते रहेंगे, या फिर उन्हें एक तय भूमिका देकर 2027 के महाकुंभ के लिए अभी से तैयार किया जाएगा? क्रिकेट फैंस और जानकारों की नज़रें आने वाली द्विपक्षीय सीरीज़ पर टिकी हैं, जहां टीम इंडिया के रोटेशन और कॉम्बिनेशन से यह साफ होगा कि यशस्वी का वनडे भविष्य किस दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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