मुकेश कुमार ने झटके 7 विकेट, फिर भी 14 नो-बॉल ने चौंकाया; दलीप ट्रॉफी सेमीफाइनल में मचा हंगामा
7 विकेट का तूफान, लेकिन 14 नो-बॉल ने बढ़ाई टेंशन: दलीप ट्रॉफी सेमीफाइनल में मुकेश कुमार के स्पेल ने चौंकाया

नई दिल्ली / स्पोर्ट्स डेस्क:
क्रिकेट के मैदान पर जब कोई तेज गेंदबाज किसी अहम मुकाबले में 7 विकेट झटक ले, तो आमतौर पर उसकी लाइन-लेंथ, रफ्तार और आक्रामकता की मिसालें दी जाती हैं। लेकिन दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल मुकाबले में टीम इंडिया के तेज गेंदबाज मुकेश कुमार के साथ कहानी थोड़ी अलग मोड़ ले चुकी है। मुकेश कुमार ने गेंद से आग उगलते हुए मैच में 7 शिकार जरूर किए, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने दोनों पारियों को मिलाकर कुल 14 नो-बॉल फेंक डालीं। एक तरफ उनकी धारदार गेंदों ने विपक्षी खेमे में खलबली मचाई, तो वहीं दूसरी तरफ उनकी इस बड़ी चूक ने क्रिकेट पंडितों और टीम मैनेजमेंट के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
दोनों पारियों में विकेटों की झड़ी, लेकिन अनुशासन पर उठे सवाल

मुकेश कुमार ने इस मुकाबले की पहली पारी से ही आक्रामक रुख अपनाया था। पहली पारी में उन्होंने 16 ओवर गेंदबाजी की और 56 रन देकर 3 अहम बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा। हालांकि, इसी स्पेल के दौरान उन्होंने 6 बार अपनी क्रीज लांघी और अंपायर को नो-बॉल का इशारा करना पड़ा।
दूसरी पारी में जब विरोधी टीम पर दबाव बनाने की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब मुकेश ने और भी घातक गेंदबाजी की। उन्होंने 12 ओवरों में महज 44 रन खर्च करके 4 बल्लेबाजों को चलता किया। लेकिन यहां भी नो-बॉल का सिलसिला थमा नहीं, बल्कि और बढ़ गया। दूसरी पारी में उनके खाते में 8 नो-बॉल और 2 वाइड गेंदें दर्ज हुईं।
पूरे मुकाबले की बात करें तो मुकेश ने कुल 28 ओवरों में 100 रन देकर 7 विकेट चटकाए, लेकिन साथ ही 14 नो-बॉल और 3 वाइड गेंदें फेंककर कुल 17 अतिरिक्त गेंदें भी डालीं। रेड बॉल क्रिकेट में, जहां गेंदबाज का नियंत्रण सबसे बड़ी ताकत माना जाता है, वहां एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के गेंदबाज की यह गलती हर किसी की समझ से परे नजर आई।
मैच का रोमांच: पहली पारी में 266-266 की बराबरी

इस सेमीफाइनल मुकाबले का रोमांच सिर्फ मुकेश कुमार की गेंदबाजी तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। मुकाबले की पहली पारी में सेंट्रल जोन की टीम ने संभलकर खेलते हुए 266 रनों का स्कोर खड़ा किया। टीम की ओर से रिंकू सिंह ने बेहतरीन अर्धशतकीय पारी खेली, जबकि आर्यन जुयाल ने 46 रनों का बहुमूल्य योगदान दिया।
जवाब में जब ईस्ट जोन की टीम मैदान पर उतरी, तो उसने भी सेंट्रल जोन के स्कोर की ठीक बराबरी कर ली। ईस्ट जोन की पारी 266 रनों पर ही सिमटी। दोनों टीमों का पहली पारी में एक समान स्कोर पर रुकना इस मुकाबले को बेहद दिलचस्प मोड़ पर ले आया।
वैभव सूर्यवंशी का ऐतिहासिक कमाल
ईस्ट जोन की पहली पारी के दौरान युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने इतिहास रच दिया। वैभव ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए अर्धशतक जड़ा और इसी के साथ वह दलीप ट्रॉफी के इतिहास में अर्धशतक जमाने वाले सबसे युवा बल्लेबाज बन गए। उनके साथ अनुभवी अभिमन्यु ईश्वरन ने भी अपनी क्लास दिखाते हुए अर्धशतक ठोका। इन दोनों की पारियों की बदौलत ही ईस्ट जोन पहली पारी में सेंट्रल जोन के स्कोर की बराबरी करने में कामयाब रहा था।
दूसरी पारी में सेंट्रल जोन 158 पर ढेर, जीत के लिए 159 का लक्ष्य
मुकाबले के तीसरे और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर ईस्ट जोन के गेंदबाजों ने मैच का पासा पलट दिया। सेंट्रल जोन की पूरी टीम दूसरी पारी में महज 50.2 ओवरों में 158 रन बनाकर सिमट गई। सेंट्रल जोन का कोई भी बल्लेबाज अर्धशतक का आंकड़ा नहीं छू सका। टीम के लिए अमन मोखडे ने सर्वाधिक 40 रन बनाए, जबकि निचले क्रम में अरशद खान ने 25 और हर्ष दुबे ने 24 रनों की संघर्षपूर्ण पारियां खेलीं।
मुकेश कुमार के 4 विकेटों की बदौलत अब ईस्ट जोन के सामने फाइनल में जगह बनाने के लिए केवल 159 रनों का लक्ष्य रखा गया है।
मैच का सबसे बड़ा सबक: क्या भारी पड़ सकती थी यह चूक?
क्रिकेट में नो-बॉल हमेशा एक दोहरा नुकसान लाती है। यह न सिर्फ विरोधी टीम को मुफ्त का रन देती है, बल्कि कई बार लीगल डिलीवरी पर मिला विकेट भी छीन लेती है। गनीमत यह रही कि इस मैच में मुकेश की नो-बॉल का बहुत बड़ा खामियाजा टीम को किसी अहम बल्लेबाज के जीवनदान के रूप में नहीं भुगतना पड़ा।
फिर भी, एक फ्रंटलाइन गेंदबाज के तौर पर 28 ओवरों में 14 बार क्रीज ओवरस्टेप करना तकनीकी रूप से बहुत बड़ी चिंता का विषय है। आने वाले बड़े मुकाबलों और राष्ट्रीय टीम के चयन की दौड़ में यह बात मुकेश कुमार के लिए एक बड़ा सबक साबित होगी कि रफ्तार और विकेट के साथ-साथ क्रीज के अनुशासन पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है। फिलहाल, नजरें इस बात पर टिकी हैं कि 159 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए ईस्ट जोन मुकाबला अपने नाम कर पाता है या नहीं।
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