Bareilly News: फर्जी महिला SDM ने नौकरी के नाम पर ठगे 36 लाख, आरोपी पर 44 मुकदमे दर्ज
फर्जी महिला SDM का बड़ा खेल! नायब तहसीलदार और BDO की नौकरी के नाम पर 36 लाख ठगे, 44 मुकदमों तक पहुंचा मामला

बरेली। उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक पदों पर भर्ती कराने के नाम पर बेरोजगार युवाओं को ठगने वाले एक बड़े गिरोह की परतें लगातार खुलती जा रही हैं। खुद को एसडीएम (SDM) बताकर युवाओं से करोड़ों रुपये ऐंठने वाली आरोपी विप्रा शर्मा और उसके परिवार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बरेली के बारादरी थाने में अब इस फर्जी महिला अफसर और उसके परिवार के खिलाफ 36 लाख रुपये की ठगी के दो नए मामले दर्ज किए गए हैं। इन दो नई प्राथमिकियों के साथ ही इस गिरोह पर दर्ज कुल मुकदमों की संख्या अब 44 तक पहुंच गई है।
नायब तहसीलदार और बीडीओ बनाने के नाम पर वसूले 36 लाख रुपये

पुलिस में दर्ज ताजा मामलों के अनुसार, सुभाषनगर के ग्रेटर कैलाश इलाके के रहने वाले दो लोग इस ठगी के नए शिकार बने हैं।
पहले मामले में पीड़ित माधव को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPCS) के जरिए ‘नायब तहसीलदार’ पद पर सीधी नियुक्ति दिलाने का झांसा दिया गया था। इसके एवज में उनसे कुल 23.50 लाख रुपये ऐंठ लिए गए। माधव ने 19.50 लाख रुपये बैंक खातों के जरिए ट्रांसफर किए, जबकि 4 लाख रुपये नकद दिए। इस सौदेबाजी के लिए पीड़ित की मुलाकात विप्रा शर्मा से उसके ग्रेटर ग्रीन पार्क स्थित आवास पर कराई गई थी।
वहीं दूसरा मामला कौशल्या नाम की महिला से जुड़ा है। उन्हें यूपीपीएससी के माध्यम से खंड विकास अधिकारी (BDO) के पद पर नौकरी लगवाने का सपना दिखाया गया और उनसे 12.50 लाख रुपये ठग लिए गए। इस मामले में संपर्क का जरिया विप्रा की बहन शिखा पाठक बनी, जो पीड़ित के भाई के मेडिकल स्टोर पर नियमित रूप से दवाएं लेने आती थी और वहीं से जान-पहचान बढ़ाकर भरोसा जीता गया था।
सरकारी अफसरों के जाली दस्तखत और मुहर वाले फर्जी नियुक्ति पत्र

ठगी के इस पूरे तंत्र को बेहद सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा था ताकि पीड़ितों को किसी तरह का शक न हो। रकम ऐंठने के बाद पीड़ितों को डाक, व्हाट्सएप और ईमेल के जरिए बकायदा सरकारी नियुक्ति पत्र (Appointment Letters) भेजे गए।
इन पत्रों को असली दिखाने के लिए उत्तर प्रदेश शासन के आयुक्त एवं सचिव संजय श्रीनेत के नाम के फर्जी हस्ताक्षर और जाली सरकारी मुहरों का इस्तेमाल किया गया था। जब पीड़ितों ने संबंधित विभागों में इन दस्तावेजों की पड़ताल की, तब जाकर उन्हें अपने साथ हुए भारी फर्जीवाड़े का अहसास हुआ।
पैसे वापस मांगने पर दी जेल भिजवाने और जान से मारने की धमकी

जब पीड़ितों को ठगी की हकीकत समझ आई और उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपी अपने असली रूप में आ गए। मुख्य आरोपी विप्रा शर्मा ने पीड़ितों को धमकाते हुए कहा कि अगर उन्होंने कहीं भी शिकायत की या पैसे मांगे, तो वह उन्हें ‘सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने’ के झूठे आरोप में जेल भिजवा देगी। इसके साथ ही पीड़ितों को जान से मारने की धमकियां भी दी गईं।
दो बहनें जेल में, पिता की तलाश में जुटी पुलिस

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में विप्रा शर्मा मुख्य भूमिका में थी, जबकि उसकी बहन शिखा पाठक और पिता वीरेंद्र कुमार शर्मा शिकार तलाशने व पैसे के लेन-देन में पूरा सहयोग करते थे।
फिलहाल विप्रा शर्मा और उसकी बहन शिखा पाठक जेल की सलाखों के पीछे हैं, जबकि मामले में नामजद उनका पिता वीरेंद्र शर्मा अब भी फरार चल रहा है। पुलिस की टीमें फरार पिता की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस का कहना है कि दर्ज मुकदमों की जांच के साथ-साथ आरोपियों की संपत्तियों और बैंक खातों की भी गहन पड़ताल की जा रही है
( Highlights)
मामला: फर्जी महिला एसडीएम बनकर यूपी में सरकारी नौकरी के नाम पर करोड़ों की ठगी।
ताजा अपडेट:बरेली के थाना बारादरी में 36 लाख रुपये की ठगी की दो नई एफआईआर दर्ज।
कुल केस:आरोपियों के खिलाफ अब तक दर्ज मुकदमों की संख्या 44 पहुंची।
आरोपी: मुख्य आरोपी विप्रा शर्मा व बहन शिखा जेल में, पिता वीरेंद्र कुमार शर्मा फरार।
टारगेट पद: नायब तहसीलदार और खंड विकास अधिकारी (BDO)
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