आबान अहमद की मौत के बाद क्या सामने आएगी शाहिस्ता परवीन? झांसी हादसे से बड़ा सवाल
झांसी सड़क हादसे में आबान अहमद की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शाहिस्ता परवीन अपने बेटे के जनाजे में शामिल होने आएगी? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

झांसी/प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के चर्चित और खौफ का दूसरा नाम रहे अतीक अहमद के परिवार पर दुखों और कानूनी शिकंजे का पहाड़ थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार, 6 अगस्त 2026 को झांसी के पास हुए एक भयानक सड़क हादसे ने एक बार फिर इस परिवार को सुर्खियों के केंद्र में ला खड़ा किया है। तेज रफ्तार कार के अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकराने के कारण अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे आबान अहमद और उनके एक साथी की मौके पर ही मौत हो गई।
मिली जानकारी के मुताबिक, आबान अहमद झांसी जेल में बंद अपने बड़े भाई अली अहमद से मुलाकात करने जा रहे थे। बता दें कि सुरक्षा कारणों और प्रशासनिक फेरबदल के चलते अली अहमद को पिछले साल 1 अक्टूबर 2025 को प्रयागराज की नैनी सेंट्रल जेल से झांसी जेल स्थानांतरित किया गया था। भाई से मिलने की इस आखिरी कोशिश में रास्ते में ही हुए इस दर्दनाक हादसे ने आबान की जिंदगी का चिराग हमेशा के लिए बुझा दिया। लेकिन इस भयानक दुर्घटना के बाद अब पुलिस महकमे, खुफिया एजेंसियों और आम जनता के बीच केवल एक ही सवाल तैर रहा है—क्या अपने सबसे छोटे और लाडले बेटे के जनाजे को देखने के लिए अतीक की भगोड़ी पत्नी शाहिस्ता परवीन अपनी तीन साल पुरानी फरारी तोड़ेगी? गोलियों का शोर, एनकाउंटर और पति का कत्ल… फिर भी सामने नहीं आई शाहिस्ता शाहिस्ता परवीन के फरार होने का सिलसिला फरवरी 2023 में हुए बहुचर्चित उमेश पाल हत्याकांड के बाद से शुरू हुआ था। उस सनसनीखेज वारदात के बाद से ही पुलिस, एसटीएफ और खुफिया एजेंसियाँ शाहिस्ता की तलाश में दिन-रात एक किए हुए हैं, लेकिन वह लगातार चकमा देने में कामयाब रही है।
इतिहास गवाह है कि शाहिस्ता परवीन ने अपने जीवन के सबसे बड़े और दर्दनाक मोड़ों पर भी पुलिस के सामने न आने का कठोर फैसला लिया था: बेटे असद का एनकाउंटर (13 अप्रैल 2023): झांसी में ही जब यूपी एसटीएफ की मुठभेड़ में अतीक का बेटा असद मारा गया था, तब प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में उसे सुपुर्द-ए-खाक किया गया। उस वक्त हर किसी को अंदेशा था कि एक माँ अपने बेटे को आखिरी बार देखने जरूर आएगी। पुलिस ने कब्रिस्तान से लेकर पूरे इलाके में कड़ा पहरा बिठा रखा था, लेकिन शाहिस्ता नहीं आई।
अतीक और अशरफ की सनसनीखेज हत्या (15 अप्रैल 2023): असद के दफनाए जाने के ठीक दो दिन बाद, मेडिकल चेकअप के लिए ले जाते समय अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। पति और देवर दोनों के जनाजे एक साथ उठे। पूरे देश की नजरें प्रयागराज पर टिकी थीं, पुलिस ने चारों तरफ जाल बिछा रखा था, मगर शाहिस्ता परवीन का कोई सुराग नहीं मिला।
कई राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी, लगातार बढ़ती इनामी राशि और दर्जन भर कानूनी मुकदमों के बावजूद शाहिस्ता परवीन आज तक कानून की गिरफ्त से बाहर है।
कसारी मसारी में फिर बढ़ा सुरक्षा का कड़ा पहरा
अब सवाल उठ रहा है कि क्या सबसे छोटे बेटे आबान की मौत शाहिस्ता के सब्र का बांध तोड़ पाएगी? अतीक के करीबियों की मानें तो आबान परिवार का सबसे छोटा बच्चा था और शाहिस्ता उससे बेपनाह मोहब्बत करती थी। घटना की खबर मिलते ही प्रयागराज और झांसी के इलाकों में हड़कंप मच गया है। पुलिस प्रशासन किसी भी तरह का जोखिम उठाने के मूड में नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, आबान के शव को सुपुर्द-ए-खाक करने की तैयारियों के बीच प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान और उसके आसपास के तमाम इलाकों में सादे कपड़ों में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। संभावित जगहों पर निगहबानी बढ़ा दी गई है और महिला पुलिस कर्मियों को विशेष रूप से अलर्ट मोड पर रखा गया है। पुलिस का मानना है कि बुर्के की आड़ में शाहिस्ता कब्रिस्तान पहुँचने की कोशिश कर सकती है।
क्या इस बार टूटेगी फरारी?
कानूनी मामलों के जानकारों और स्थानीय विश्लेषकों का मानना है कि यह शाहिस्ता के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से सबसे कठिन क्षण है। एक माँ के लिए अपने सबसे छोटे बेटे को खोने का दर्द सहना आसान नहीं होता। लेकिन अतीत का रिकॉर्ड देखें तो शाहिस्ता ने हमेशा भावना से ऊपर उठकर फरारी को तरजीह दी है। अब पूरी दुनिया की नजरें कसारी-मसारी कब्रिस्तान के उस रास्ते पर टिकी हैं, जहाँ आबान को अंतिम विदाई दी जानी है। क्या कानून की नजरों से बचती आ रही शाहिस्ता परवीन अपने कलेजे के टुकड़े को आखिरी बार देखने का जोखिम उठाएगी, या फिर एक बार फिर पुलिस का बिछाया जाल खाली रह जाएगा? इसका जवाब अगले कुछ घंटों में साफ हो जाएगा।
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