उत्तर प्रदेश

IAS Divya Mittal Resignation: दिव्या मित्तल का इस्तीफा मंजूर, 13 साल का प्रशासनिक सफर खत्म

IAS दिव्या मित्तल का इस्तीफा केंद्र सरकार ने मंजूर कर लिया है। 15 सितंबर 2026 से उनका इस्तीफा प्रभावी होगा। जानिए 13 साल के प्रशासनिक सफर की पूरी कहानी।

लखनऊ / नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित और तेजतर्रार 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल का भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) से दिया गया इस्तीफा केंद्र सरकार ने औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने इस संबंध में विधिवत मंजूरी देते हुए अधिसूचना जारी कर दी है। इसके साथ ही प्रशासनिक सेवा में उनके करीब 13 वर्षों के लंबे और सक्रिय सफर का औपचारिक समापन हो गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिव्या मित्तल का यह त्यागपत्र 15 सितंबर 2026 से प्रभावी माना गया है। इससे पहले, दिव्या मित्तल द्वारा इस्तीफा सौंपे जाने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए फाइल केंद्र सरकार के पास अनुमोदन के लिए भेजी थी, जहां DoPT ने इस पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी।

सोशल मीडिया पर साझा की जानकारी, लिखा बढ़े चलो

इस्तीफा मंजूर होने के बाद दिव्या मित्तल ने अपने आधिकारिक ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर यह जानकारी साझा की। उन्होंने पोस्ट करते हुए लिखा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा से उनका त्यागपत्र स्वीकार कर लिया गया है। इस घोषणा के साथ उन्होंने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की सुप्रसिद्ध पंक्तियों को उद्धृत करते हुए लिखा—

«“प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो।”»

उनका यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है और नौकरशाही के साथ-साथ आम नागरिकों के बीच भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है।

30 अगस्त को की थी इस्तीफे की घोषणा

दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त 2026 को सिविल सेवा से अलग होने का फैसला लेते हुए अपने इस्तीफे की सार्वजनिक घोषणा की थी। उस समय उन्होंने अपने लगभग 13 साल के प्रशासनिक सफर को याद करते हुए एक भावुक संदेश साझा किया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि वह अपनी व्यक्तिगत इच्छा से इस यात्रा को यहीं विराम दे रही हैं।

इस्तीफे के पीछे उन्होंने किसी विवाद या दबाव के बजाय निजी प्राथमिकताओं, पारिवारिक जिम्मेदारियों और जीवन में नए लक्ष्यों की ओर कदम बढ़ाने की बात कही थी। उन्होंने अपने संदेश में लिखा था कि एक बेहद साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर बड़े सपने देखने, आईआईटी और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से तालीम हासिल करने और विदेश में एक शानदार कॉर्पोरेट करियर जीने के बाद भी उनके भीतर कुछ अधूरापन था, जिसने उन्हें प्रशासनिक सेवा की राह दिखाई थी।

कॉर्पोरेट की चकाचौंध छोड़ चुनी थी जनसेवा की राह

दिव्या मित्तल की शैक्षिक और पेशेवर यात्रा युवाओं के लिए खासी प्रेरणादायक रही है। उन्होंने देश के शीर्ष तकनीकी संस्थान आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने प्रबंधन की पढ़ाई के लिए आईआईएम बैंगलोर (IIM Bangalore) का रुख किया। उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद उन्हें लंदन में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में बेहतरीन पैकेज पर नौकरी मिली।

लंदन में एक सुखद और सफल करियर होने के बावजूद उनके मन में देश लौटकर प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा बनने और समाज के लिए सीधे तौर पर काम करने की इच्छा प्रबल थी। इसी संकल्प के साथ उन्होंने नौकरी छोड़कर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी शुरू की। अपने दूसरे ही प्रयास में उन्होंने शानदार सफलता हासिल की और साल 2013 में आईएएस अधिकारी बनीं।

मिर्जापुर में 75 साल बाद पानी पहुंचाकर बटोरी थीं सुर्खियां

अपने करीब 13 साल के प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में विभिन्न पदों पर अपनी सेवाएं दीं। इनमें बतौर जिलाधिकारी (DM) मिर्जापुर में उनका कार्यकाल सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा।

मिर्जापुर के दुर्गम और पथरीले हलिया ब्लॉक में स्थित लहुरियादह गांव वर्षों से भीषण जल संकट से जूझ रहा था। आजादी के 75 साल बीत जाने के बाद भी इस पहाड़ी गांव तक पीने का साफ पानी नहीं पहुंच सका था। दिव्या मित्तल ने इसे एक चुनौती के रूप में लिया और तमाम तकनीकी बाधाओं को पार करते हुए गांव तक पाइपलाइन के जरिए नल का जल पहुंचाया। जब गांव में पहली बार नलों से पानी टपका, तो ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इस कार्य के लिए उनकी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर खूब सराहना हुई थी। इसके अलावा भी वे जनसमस्याओं के त्वरित समाधान और सख्त प्रशासनिक कार्यशैली के लिए जानी जाती रहीं।

अब जीवन के नए अध्याय की शुरुआत

प्रशासनिक गलियारों में एक संवेदनशील और कर्मठ छवि रखने वाली दिव्या मित्तल के इस फैसले ने प्रशासनिक हलकों को हैरान जरूर किया है, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया है कि जीवन के इस मोड़ पर वह अपने परिवार और नए रचनात्मक लक्ष्यों को समय देना चाहती हैं। 15 सितंबर से सेवामुक्त होने के बाद अब वह अपने जीवन के नए अध्याय की ओर कदम बढ़ा रही हैं।

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संपादक रजनी शर्मा 

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