BPSC 70th Result: मुस्कान कुमारी की 80वीं रैंक, SDM क्यों नहीं बनीं?
बेगूसराय की 21 वर्षीय मुस्कान कुमारी ने BPSC 70th में 80वीं रैंक हासिल कर शानदार सफलता पाई। लेकिन उम्र से जुड़े नियम के कारण SDM पद नहीं मिल सका। पढ़ें पूरी कहानी।

बिहार डेस्क: कहते हैं कि अगर हौसलों में जान हो, तो कोई भी रुकावट आपका रास्ता नहीं रोक सकती। बिहार की एक बेटी ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में बेगूसराय के बखरी की रहने वाली 21 वर्षीय मुस्कान कुमारी ने शानदार कामयाबी हासिल करते हुए पूरे राज्य में 80वीं रैंक प्राप्त की है। इतनी कम उम्र और शादीशुदा होने के बावजूद मुस्कान की इस उपलब्धि ने हर किसी को हैरान कर दिया है।
लेकिन इस चमचमाती कामयाबी के बीच एक ऐसा तकनीकी पेच सामने आया, जिसने मुस्कान को मेरिट लिस्ट में ऊपर होने के बावजूद सबसे प्रतिष्ठित पद यानी SDM (अनुमंडल दंडाधिकारी) की कुर्सी से दूर कर दिया। प्रशासनिक नियमों की एक ऐसी लकीर सामने आ गई, जिसने मेरिट लिस्ट के समीकरण बदल दिए।
उम्र का फेर: मेरिट में दम, फिर भी नियम बना रोड़ा

मुस्कान कुमारी ने BPSC की इस कठिन परीक्षा में 80वीं रैंक हासिल करके यह साबित कर दिया कि उनकी तैयारी में कोई कमी नहीं थी। इस शानदार रैंक के आधार पर वे प्रशासनिक सेवा के सबसे बड़े पद SDM की दावेदार मानी जा रही थीं।
हालांकि, प्रशासनिक नियमों के तहत SDM पद के लिए निर्धारित न्यूनतम आयु सीमा 22 वर्ष तय है। परीक्षा के समय मुस्कान की उम्र महज 21 वर्ष थी। महज कुछ महीनों के अंतर के कारण नियमों की बंदिशें आड़े आ गईं और उन्हें SDM पद के लिए तकनीकी रूप से अपात्र माना गया। इसके चलते उनका चयन असिस्टेंट प्लानिंग ऑफिसर (सहायक योजना पदाधिकारी – APO) के पद पर हुआ। भले ही वे प्रशासनिक कुर्सी से तकनीकी वजहों से चूक गईं, लेकिन उनकी 80वीं रैंक ने प्रशासनिक गलियारों से लेकर आम जनता तक खूब सुर्खियां बटोरी हैं।
शादी की रस्मों के बीच नहीं थमी किताबों की रफ्तार

मुस्कान की इस कामयाबी की गूंज सिर्फ उनकी रैंक की वजह से नहीं, बल्कि उनके संघर्ष की वजह से ज्यादा है। शादी के बाद अमूमन घरेलू जिम्मेदारियों के बोझ तले महिलाओं की पढ़ाई पीछे छूट जाती है, लेकिन मुस्कान ने इस पुरानी सोच को तोड़ा।
सफलता के बाद अपनी बात रखते हुए मुस्कान ने कहा कि किसी भी शादीशुदा महिला के लिए घर-परिवार और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता, लेकिन अगर दोनों तरफ से मजबूत सहारा मिले तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं है। मुस्कान ने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय अपने मायके और ससुराल दोनों पक्षों को दिया। उन्होंने कहा, “अक्सर शादी के बाद बेटियों के सपनों पर ताला लग जाता है, लेकिन अगर ससुराल वाले बहू को अपनी बेटी समझकर उसके सपनों को उड़ान दें, तो परिणाम सबके सामने होते हैं।
सम्मान और बधाइयों का तांता

मुस्कान की इस शानदार कामयाबी के बाद बखरी समेत पूरे बेगूसराय में जश्न का माहौल है। उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। इस ऐतिहासिक प्रदर्शन को देखते हुए एक विशेष अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता त्रिपुरारी साह ने की और मंच संचालन पूर्व महामंत्री नीरज नवीन द्वारा किया गया।
इस मौके पर समाज और सरकार के प्रतिनिधियों ने मुस्कान की लगन की जमकर सराहना की। कार्यक्रम में तैलिक वैश्य संघ की ओर से उन्हें प्रतिष्ठित “भामाशाह रत्न सम्मान” से नवाजा गया। इसके साथ ही बिहार सरकार के मंत्री संजय पासवान ने भी मुस्कान की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर उन्हें सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
21 साल की उम्र में मुस्कान की यह उड़ान आज बिहार और देशभर की उन लाखों बेटियों के लिए एक खुली मिसाल बन चुकी है, जो शादी के बाद भी बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की हिम्मत रखती हैं।
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