Ishan Kishan: दलीप ट्रॉफी में 350 रन ठोककर टीम इंडिया में वापसी का दावा मजबूत
ईशान किशन ने मचाया तहलका! दलीप ट्रॉफी में 350 रन, अब टेस्ट टीम में वापसी की बारी?

भारतीय घरेलू क्रिकेट में लंबे समय बाद किसी बल्लेबाज का ऐसा दबदबा देखने को मिला है, जिसने चयनकर्ताओं से लेकर क्रिकेट पंडितों तक सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। दलीप ट्रॉफी के खिताबी मुकाबले में ईस्ट जोन की कप्तानी कर रहे ईशान किशन ने बल्ले से ऐसा कहर बरपाया, जिसकी गूंज सीधे राष्ट्रीय चयन समिति के कानों तक पहुंची है। चेन्नई के ऐतिहासिक एमए चिदंबरम स्टेडियम (चेपक) की तपती गर्मी और साउथ जोन के धारदार गेंदबाजी आक्रमण के सामने ईशान ने न केवल धैर्य की नई मिसाल पेश की, बल्कि दोनों पारियों को मिलाकर कुल 350 रन ठोक डाले।
चेपक में 9 घंटे का मैराथन संघर्ष और 270 रनों की मैराथन पारी
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साउथ जोन के खिलाफ इस फाइनल मुकाबले की पहली पारी में जब ईस्ट जोन को एक ठोस शुरुआत और लंबी पारी की दरकार थी, तब कप्तान ईशान किशन ने जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली। उन्होंने 334 गेंदों का सामना करते हुए 270 रनों की अविश्वसनीय पारी खेली। करीब 9 घंटे से ज्यादा समय तक क्रीज पर खूंटा गाड़कर बल्लेबाजी करना यह साबित करता है कि सीमित ओवरों के आक्रामक बल्लेबाज के रूप में पहचाने जाने वाले ईशान ने अपनी तकनीक और मानसिक मजबूती पर कितना गहरा काम किया है।
ईशान की इस पारी की खासियत उनका शॉट चयन रहा। जहां जरूरत थी वहां उन्होंने गेंद को पूरा सम्मान दिया और ढीली गेंदों को बाउंड्री के पार भेजने में कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाई। पहली पारी के इस विशाल स्कोर के बाद जब वे दूसरी पारी में उतरे, तो उन्होंने फिर से साउथ जोन के गेंदबाजों को राहत की सांस नहीं लेने दी और तेज तर्रार 80 रन जड़ दिए। दोनों पारियों में मिलाकर 350 रन बनाकर उन्होंने लाल गेंद के प्रारूप में अपनी श्रेष्ठता साबित कर दी है।
रणजी से दलीप ट्रॉफी तक निरंतरता की मिसाल

ईशान किशन का यह प्रदर्शन कोई तुक्का नहीं है, बल्कि यह घरेलू सत्र में उनकी लगातार जारी मेहनत का प्रतिफल है। इससे पहले 2025-26 रणजी ट्रॉफी सीजन में भी उन्होंने तमिलनाडु जैसी मजबूत टीम के खिलाफ 247 गेंदों पर 173 रनों की शानदार पारी खेली थी। घरेलू मैदानों पर लगातार पसीना बहाने, अपनी गलतियों से सीखने और आत्ममंथन के बाद ईशान के खेल में जो परिपक्वता आई है, वह अब उनके आंकड़ों में साफ झलक रही है। वे केवल क्रीज पर टिक नहीं रहे, बल्कि मैच की परिस्थितियों के अनुसार खेल की गति को नियंत्रित भी कर रहे हैं।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर और उनके साथी खिलाड़ी सौरभ तिवारी ने ईशान के इस फॉर्म पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि ईशान का यह रूप अचानक सामने नहीं आया है। उन्होंने पिछले कुछ महीनों में अपनी फिटनेस, टाइमिंग और क्रीज पर टिके रहने के स्वभाव पर असाधारण काम किया है। लगातार बड़ी पारियां खेलना ही एक बड़े खिलाड़ी की असली पहचान होती है और ईशान ठीक वही कर रहे हैं।
विशेषज्ञ बल्लेबाज के तौर पर टीम इंडिया में नया विकल्प

इस धमाकेदार प्रदर्शन के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या ईशान किशन की अब टेस्ट टीम में सीधी एंट्री होगी? पूर्व मुख्य चयनकर्ता और दिग्गज विकेटकीपर सबा करीम का मानना है कि ईशान को अब केवल एक विकेटकीपर बल्लेबाज के दायरे में बांधकर देखना सही नहीं होगा। सबा करीम के मुताबिक, ईशान ने लाल गेंद से जिस तरह का संयम और क्लास दिखाया है, उससे वे भारतीय टेस्ट एकादश में एक विशेषज्ञ बल्लेबाज के रूप में भी पूरी तरह फिट बैठते हैं।
भारतीय टीम को आगामी टेस्ट सीरीज में मध्यक्रम में ऐसे खिलाड़ियों की दरकार है जो दबाव झेलने के साथ-साथ विरोधी गेंदबाजों पर हावी हो सकें। ईशान बाएं हाथ के बल्लेबाज होने के कारण टीम के बल्लेबाजी क्रम को एक बेहतरीन संतुलन भी देते हैं।
चयनकर्ताओं के लिए सिरदर्दी, ईशान के लिए नए रास्ते

ईशान किशन के इस 350 रनों के विशाल योगदान ने चयनकर्ताओं के सामने सुखद सिरदर्दी खड़ी कर दी है। टीम से बाहर रहने के बाद घरेलू क्रिकेट में लौटकर इस तरह का प्रदर्शन करना किसी भी खिलाड़ी के आत्मबल को दर्शाता है। चेपक की मुश्किल पिच पर 9 घंटे से ज्यादा डटे रहकर उन्होंने आलोचकों को अपने बल्ले से करारा जवाब दिया है। अब देखना यह होगा कि आगामी अंतरराष्ट्रीय दौरों के लिए जब भारतीय टेस्ट टीम की घोषणा होगी, तो क्या ईशान का यह मैराथन प्रदर्शन उन्हें वापस नीली और सफेद जर्सी में ला खड़ा करेगा।
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