दिल्ली में सियासी भूचाल: सोनम वांगचुक के अनशन को मिला समाजवादी पार्टी का खुला समर्थन, जंतर-मंतर पहुंचीं सांसद डिंपल यादव
दिल्ली में सियासी भूचाल: सोनम वांगचुक के अनशन को मिला समाजवादी पार्टी का खुला समर्थन, जंतर-मंतर पहुंचीं सांसद डिंपल यादव

विशेष संवादाता राजकुमार
नई दिल्ली / लखनऊ:
देश की राजधानी दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर एक बार फिर बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन का गवाह बन रहा है। शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों और NEET पेपर लीक मामले के खिलाफ पिछले 19 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे प्रमुख शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के आंदोलन को अब देश की मुख्य विपक्षी ताकतों में से एक, समाजवादी पार्टी (सपा) का खुला समर्थन मिल गया है। इस घटनाक्रम ने दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश तक की राजनीति में भारी हलचल पैदा कर दी है।
जंतर-मंतर पहुंचीं डिंपल यादव, जाना वांगचुक का हाल
आंदोलन के 19वें दिन उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव खुद जंतर-मंतर धरना स्थल पर पहुंचीं। उनके साथ आजमगढ़ से सपा सांसद धर्मेंद्र यादव भी मौजूद रहे। डिंपल यादव ने सोनम वांगचुक से मुलाकात की और उनके गिरते स्वास्थ्य को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। सपा सांसदों ने आंदोलनकारियों के बीच बैठकर स्पष्ट किया कि यह लड़ाई सिर्फ किसी एक राज्य या व्यक्ति की नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़ी है। डिंपल यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी युवाओं और छात्रों के हक में उठाए गए इस कदम के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।

अखिलेश यादव ने की अनशन खत्म करने की अपील
इस आंदोलन को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पहले ही अपना रुख साफ कर चुके हैं। उन्होंने सोनम वांगचुक के इस कदम की सराहना करते हुए और उनके बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए उनसे अपना अनशन समाप्त करने की भावुक अपील की थी। सपा प्रमुख की इसी संवेदनशीलता को आगे बढ़ाते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का धरना स्थल पर आना जारी है। डिंपल यादव और धर्मेंद्र यादव से पहले सपा सांसद प्रिया सरोज और नरेश उत्तम पटेल भी जंतर-मंतर पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं और पार्टी का समर्थन पत्र सौंप चुके हैं।

क्यों सुलग रहा है आंदोलन? क्या हैं मुख्य मांगें
सोनम वांगचुक का यह आंदोलन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले आयोजित किया जा रहा है, जिसने अपनी तीखी मांगों से सरकार की नींद उड़ा रखी है। आंदोलनकारियों की मुख्य मांगें देश की शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल बदलाव को लेकर हैं।
1.NEET पेपर लीक मामले पर सख्त कार्रवाई: देश के लाखों मेडिकल परीक्षार्थियों के भविष्य के साथ हुए खिलवाड़ के खिलाफ तुरंत और ठोस दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
2.शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: आंदोलनकारियों का साफ तौर पर कहना है कि देश में बार-बार हो रहे पेपर लीक और प्रशासनिक विफलताओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
3.व्यापक शिक्षा सुधार: देश में एक पारदर्शी और छात्र-हितैषी शिक्षा नीति लागू की जाए, जिससे मेधावी छात्रों का हक न मारा जा सके।
स्वास्थ्य को लेकर हाई कोर्ट में सुनवाई
लगातार 19 दिनों से अन्न का एक भी दाना न लेने के कारण सोनम वांगचुक की शारीरिक स्थिति अत्यंत चिंताजनक हो गई है। उनके स्वास्थ्य में आ रही भारी गिरावट का मामला अब अदालत की चौखट तक भी पहुंच चुका है। हाई कोर्ट में वांगचुक के स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत ने भी माना कि किसी भी नागरिक के जीवन की सुरक्षा और उसका स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण है। इस कानूनी दखल के बाद प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया है।
बदलेगा देश की राजनीति का रुख?
राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोनम वांगचुक के इस गैर-राजनैतिक आंदोलन को जिस तरह विपक्ष और विशेषकर समाजवादी पार्टी ने हाथों-हाथ लिया है, उसने इसे एक बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया है। NEET और शिक्षा के गिरते स्तर को लेकर युवाओं में पहले से ही आक्रोश था, और अब जंतर-मंतर पर विपक्ष के बड़े चेहरों के जुटने से यह प्रदर्शन सरकार को घेरने का एक नया और अचूक सियासी हथियार बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सरकार इस बढ़ते जन-आक्रोश और विपक्ष के तीखे हमलों का सामना किस तरह करती है।
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