संसद में पुजारी बन पहुंचे पप्पू यादव, राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर विपक्ष का अनोखा प्रदर्शन
संसद के मकर द्वार पर पुजारी के वेश में पहुंचे सांसद, राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर विपक्ष का अनोखा विरोध; सचिवालय हुआ सख्त

सम्पादक रजनी शर्मा
नई दिल्ली:
संसद भवन का मकर द्वार एक बेहद असामान्य और नाटकीय राजनीतिक घटनाक्रम का गवाह बना। अयोध्या के प्रसिद्ध राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे को लेकर विपक्षी सांसदों ने न सिर्फ जोरदार हंगामा किया, बल्कि विरोध जताने के लिए एक अनूठा स्वांग भी रचा। इस अनोखे प्रदर्शन के बाद संसद परिसर में अनुशासन को लेकर बहस तेज हो गई है।
संसद के इतिहास में कई तरह के विरोध-प्रदर्शन दर्ज हैं, लेकिन मकर द्वार पर जो नजारा देखने को मिला, उसने हर किसी का ध्यान खींच लिया। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव बाकायदा एक पुजारी का वेश धारण कर वहां रखी एक प्रतीकात्मक दानपेटी के पास बैठ गए। इसके कुछ ही देर बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एक आम श्रद्धालु की तरह वहां पहुंचे और उन्होंने दानपेटी में सांकेतिक रूप से पैसे डाले।
घटनाक्रम का सबसे नाटकीय मोड़ तब आया जब राहुल गांधी के पैसे डालते ही पुजारी बने पप्पू यादव ने फौरन वे पैसे उठाकर अपनी जेब में रख लिए। इस पूरे अभिनय के जरिए विपक्षी दल यह संदेश देने की कोशिश कर रहे थे कि अयोध्या में भक्तों द्वारा श्रद्धा से चढ़ाया गया दान सुरक्षित नहीं है और उसमें गड़बड़ी की जा रही है। इस दौरान मकर द्वार पर मौजूद तमाम विपक्षी सांसदों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी और ‘चोर-चोर’ तथा ‘चढ़ावा चोर’ के नारे लगाए।
लोकसभा सचिवालय का कड़ा रुख और स्पीकर की नाराजगी

संसद परिसर के भीतर इस तरह के नाटकीय प्रदर्शन और वेशभूषा बदल कर किए गए विरोध पर लोकसभा सचिवालय ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा अध्यक्ष ने इस पूरे आचरण पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है और संसद की गरिमा व मर्यादा बनाए रखने के लिए मौजूदा नियमों को सख्ती से लागू करने के निर्देश जारी किए हैं।
सचिवालय के अधिकारियों ने साफ किया है कि मकर द्वार जैसे अति-संवेदनशील स्थान पर किसी भी तरह के धरना या प्रदर्शन की अनुमति पहले से ही नहीं है। ऐसे में वेश बदलकर स्वांग रचना, मंचन करना या नाटकीय गतिविधियां आयोजित करना नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। भविष्य में इस प्रकार की हरकतों को रोकने के लिए गाइडलाइंस को और अधिक कड़ाई से लागू किया जाएगा।
सपा सांसद ने उठाई चर्चा की मांग

फैजाबाद (अयोध्या) सीट से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने याद दिलाया कि राम मंदिर के चढ़ावे में अनियमितता का यह गंभीर मुद्दा सबसे पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उठाया था। अवधेश प्रसाद ने मांग की कि इस विषय की संवेदनशीलता को देखते हुए संसद में इस पर विस्तृत और निष्पक्ष चर्चा कराई जानी चाहिए।
अन्य मुद्दों पर भी हंगामा, राज्यसभा में नोटिस खारिज
राम मंदिर चढ़ावे के अलावा विपक्ष ने अन्य ज्वलंत मुद्दों को लेकर भी सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हाल ही में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का कड़ा विरोध करते हुए विपक्षी सदस्यों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की।
उधर राज्यसभा में भी माहौल गरमाया रहा। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने देश के विभिन्न मुद्दों पर तुरंत चर्चा कराने के उद्देश्य से नियम 267 के तहत कार्यस्थगन का नोटिस दिया। हालांकि, सभापति ने नियमों का हवाला देते हुए इस नोटिस को खारिज कर दिया, जिसके बाद सदन में काफी देर तक शोर-शराबा देखने को मिला। संसद के इस घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में विपक्ष इन मुद्दों पर अपना रुख और सख्त करने वाला है।
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