कानपुर में दरोगा पर एमटेक छात्रा से दुष्कर्म, जबरन गर्भपात, शादी के बाद मारपीट और न्याय न मिलने का आरोप
खाकी के रसूख तले दबा इंसाफ? कानपुर में दरोगा पर एमटेक छात्रा से दरिंदगी और मारपीट का आरोप, न्याय के लिए दर-दर भटक रही पीड़िता

जिला संवाददाता राज कुमार
कानपुर (उत्तर प्रदेश) कानपुर से कानून-व्यवस्था और पुलिस महकमे को कटघरे में खड़ा करने वाला एक बेहद संगीन मामला सामने आया है। जहां पुलिस का काम पीड़िता को इंसाफ दिलाना होता है, वहीं जब आरोपी खुद वर्दीधारी हो, तो न्याय की राह कितनी दुश्वार हो जाती है, इसकी बानगी शहर में देखने को मिल रही है। नौबस्ता थाने में तैनात एक दरोगा पर एमटेक की छात्रा ने शादी का झांसा देकर यौन शोषण करने, जबरन गर्भपात कराने और शादी के बाद बेदर्दी से मारपीट कर शरीर की हड्डियां तोड़ देने जैसे सनसनीखेज आरोप लगाए हैं।
पीड़िता का आरोप है कि आरोपी दरोगा सत्येंद्र गौतम अपने पद और रसूख का इस्तेमाल कर कार्रवाई से बच रहा है, जबकि वह न्याय की आस में आला अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है।
सोशल मीडिया पर दोस्ती से शुरू हुआ ‘छल’ का खेल

पूरे घटनाक्रम की शुरुआत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए हुई थी। कानपुर में तैनात दरोगा सत्येंद्र गौतम की पहचान एमटेक की पढ़ाई कर रही छात्रा से हुई। धीरे-धीरे बातचीत का सिलसिला बढ़ा और दोस्ती प्यार में बदल गई। पीड़िता का दावा है कि सत्येंद्र ने उसे शादी का झांसा दिया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। लेकिन इस कहानी में मोड़ तब आया जब छात्रा गर्भवती हो गई। आरोप है कि जब पीड़िता ने शादी का दबाव बनाया, तो दरोगा ने धोखे से उसका गर्भपात (Abortion) करवा दिया और शादी के वादे से साफ मुकर गया।
एफआईआर से बचने के लिए रचाई ‘शादी’

दरोगा के मुकरने के बाद जब पीड़िता ने हिम्मत जुटाई और रेप का केस दर्ज कराने के लिए पुलिस कमिश्नर दफ्तर का रुख किया, तो मामला गर्मा गया। अपनी नौकरी और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए दरोगा सत्येंद्र ने पैंतरा बदला। आरोपियों ने पीड़िता को समझा-बुझाकर और कार्रवाई न करने की शर्त पर शादी का प्रस्ताव दिया। इसके बाद 12 देवी मंदिर में आनन-फानन में शादी रचाई गई। बाद में हनुमंत बिहार थाने के माध्यम से 22 फरवरी को इस शादी का बाकायदा रजिस्ट्रेशन भी कराया गया। पीड़िता को लगा कि शायद उसकी जिंदगी अब पटरी पर लौट आएगी, लेकिन असली हैवानियत का दौर तो अभी शुरू होना बाकी था। जबड़ा और कूल्हा तोड़ा, फिर घर से खदेड़ा पीड़िता का आरोप है कि दरोगा ने केवल कानून के शिकंजे और एफआईआर से बचने के लिए शादी का नाटक किया था। शादी के कुछ ही समय बाद दरोगा का रुख पूरी तरह बदल गया। उसके साथ आए दिन मारपीट और मानसिक उत्पीड़न किया जाने लगा।
उत्पीड़न की हदें तब पार हो गईं जब दरोगा ने पीड़िता के साथ इस कदर बर्बरता से मारपीट की कि उसका जबड़ा दो जगहों से टूट गया और कूल्हे की हड्डी में गंभीर चोट आई। गंभीर रूप से घायल अवस्था में पीड़िता को घर से बाहर निकाल दिया गया। इतना ही नहीं, कानूनी शिकंजे से पूरी तरह मुक्त होने के लिए दरोगा ने अब अदालत में तलाक (Divorce) की अर्जी भी दाखिल कर दी है।
अपनों को बचाने में जुटी पुलिस?
गंभीर रूप से घायल और मानसिक रूप से टूट चुकी पीड़िता अब इंसाफ पाने के लिए पुलिस कमिश्नर दफ्तर, महिला थाना और डीसीपी (साउथ) कार्यालय के चक्कर काट रही है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इतने गंभीर आरोपों और मेडिकल साक्ष्यों के बावजूद अभी तक मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। पीड़िता ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि आरोपी के दरोगा होने के कारण पुलिस महकमा अपने ही साथी को बचाने में लगा हुआ है। मामले को दबाने और पीड़िता को थकाने की कोशिश की जा रही है।
पुलिस प्रशासन की सफाई: एडीसीपी को सौंपी गई जांच
मामले के तूल पकड़ने और मीडिया कवरेज के बाद पुलिस प्रशासन की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है। डीसीपी (साउथ) दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि दोनों पक्षों को बुलाकर तीन बार काउंसलिंग कराने का प्रयास किया गया था, लेकिन दोनों के बीच सहमति नहीं बन सकी। डीसीपी साउथ के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी निष्पक्ष जांच एडीसीपी (दक्षिण) को सौंपी गई है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर वैधानिक और निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या खाकी के रसूख के बीच एमटेक की इस छात्रा को इंसाफ मिल पाता है या फिर मामले को कागजी जांच के जाल में उलझाकर छोड़ दिया जाएगा।
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