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पुश्तैनी जमीन के पुराने कागज नहीं मिल रहे? ऐसे निकालें जमीन का रिकॉर्ड

पुश्तैनी जमीन के पुराने कागज खो गए हैं? घर बैठे ऐसे निकालें खतौनी, रजिस्ट्री और जमीन का रिकॉर्ड

नई दिल्ली कई परिवारों के पास दादा-परदादा या पूर्वजों की पुश्तैनी जमीन होती है, लेकिन समय के साथ उसके पुराने कागजात खो जाते हैं या परिवार के किसी सदस्य के पास रह जाते हैं। ऐसी स्थिति में जमीन का रिकॉर्ड दोबारा हासिल किया जा सकता है। इसके लिए भूलेख, खतौनी, जमाबंदी, रजिस्ट्री और नामांतरण जैसे रिकॉर्ड मददगार हो सकते हैं।

सबसे पहले पता करें जमीन किसके नाम दर्ज है

अगर जमीन के पुराने कागज आपके पास नहीं हैं तो सबसे पहले यह पता करना जरूरी है कि सरकारी रिकॉर्ड में जमीन फिलहाल किसके नाम दर्ज है। इसके लिए संबंधित राज्य के आधिकारिक भू-अभिलेख पोर्टल पर रिकॉर्ड देखा जा सकता है।

आमतौर पर जमीन खोजने के लिए जिला, तहसील, गांव और खसरा या गाटा नंबर जैसी जानकारी की जरूरत पड़ती है। अगर खसरा या गाटा नंबर उपलब्ध नहीं है तो परिवार के पुराने सदस्यों से जानकारी लेने के अलावा पुराने दस्तावेज, लगान की रसीद या जमीन से जुड़े अन्य कागज भी देखे जा सकते हैं।

ऑनलाइन भूलेख से ऐसे खोजें रिकॉर्ड

देश के अलग-अलग राज्यों में भूमि रिकॉर्ड के लिए अलग-अलग सरकारी पोर्टल हैं। केंद्र सरकार के भूमि संसाधन विभाग के अनुसार रिकॉर्ड ऑफ राइट्स की प्रति संबंधित राजस्व कार्यालय या उपलब्ध ऑनलाइन/सीएससी सेवाओं के जरिए प्राप्त की जा सकती है।

पोर्टल पर आमतौर पर जमीन की लोकेशन और उपलब्ध रिकॉर्ड संबंधी जानकारी भरकर रिकॉर्ड देखा जा सकता है। राज्य के हिसाब से रिकॉर्ड का नाम और प्रक्रिया अलग हो सकती है।

पुरानी रजिस्ट्री नहीं है तो क्या करें?

अगर जमीन कभी खरीदी या बेची गई थी और उसकी रजिस्ट्री का मूल कागज अब नहीं मिल रहा है, तो संबंधित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय के रिकॉर्ड से जानकारी तलाश की जा सकती है।

पुराने मालिक या खरीदार का नाम, जमीन की लोकेशन और अनुमानित रजिस्ट्री वर्ष जैसी जानकारी रिकॉर्ड खोजने में मदद कर सकती है। रिकॉर्ड उपलब्ध होने पर नियमों के अनुसार उसकी प्रमाणित प्रति के लिए आवेदन किया जा सकता है।

नामांतरण का रिकॉर्ड भी जरूर देखें

पुश्तैनी जमीन के मामले में नामांतरण यानी म्यूटेशन रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण हो सकता है। उदाहरण के लिए, अगर जमीन पहले दादा के नाम थी और उनके निधन के बाद वारिसों के नाम दर्ज हुई, तो उस बदलाव से संबंधित रिकॉर्ड सरकारी दस्तावेजों में मिल सकता है।

पुराने और वर्तमान रिकॉर्ड को मिलाने से जमीन के रिकॉर्ड में समय के साथ हुए बदलावों को समझने में मदद मिलती है।

खतौनी या जमाबंदी से भी मिल सकती है जानकारी

कई राज्यों में जमीन से संबंधित रिकॉर्ड खतौनी, जमाबंदी या अन्य नामों से उपलब्ध होते हैं। इनमें जमीन के खातेदार, खसरा/गाटा, क्षेत्रफल और अन्य विवरण दर्ज हो सकते हैं।

अगर बहुत पुराना रिकॉर्ड ऑनलाइन नहीं मिल रहा है तो संबंधित तहसील या राजस्व कार्यालय में पुराने अभिलेखों के बारे में जानकारी ली जा सकती है।

कागज खो गया है तो घबराने की जरूरत नहीं

किसी जमीन की रजिस्ट्री या दूसरा मूल दस्तावेज खो जाने का मतलब यह नहीं है कि उसका रिकॉर्ड हमेशा के लिए खत्म हो गया। जिस कार्यालय में दस्तावेज दर्ज हुआ था, वहां उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर प्रमाणित प्रति प्राप्त करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली जा सकती है।

अगर दस्तावेज चोरी या गुम हुआ है तो परिस्थितियों के अनुसार गुमशुदगी या पुलिस शिकायत का रिकॉर्ड भी रखना उपयोगी हो सकता है।

पुश्तैनी जमीन में इन दस्तावेजों को संभालकर रखें

जमीन का रिकॉर्ड मिलने के बाद उसकी डिजिटल और कागजी कॉपी सुरक्षित रखना बेहतर है। खास तौर पर:

रजिस्ट्री या बिक्री विलेख
खसरा-खतौनी/जमाबंदी
नामांतरण का रिकॉर्ड
भूमि कर या लगान की रसीद
उत्तराधिकार/वरासत से जुड़े दस्तावेज
जमीन से संबंधित अन्य पुराने रिकॉर्ड

इन दस्तावेजों को सुरक्षित रखने से भविष्य में जमीन के रिकॉर्ड की जांच और परिवार के बीच किसी विवाद की स्थिति में मदद मिल सकती है।

जरूरी बात ऑनलाइन दिखाई देने वाला भूमि रिकॉर्ड हर मामले में मालिकाना हक का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। जमीन खरीदने-बेचने, विरासत या विवाद के मामलों में मूल और प्रमाणित दस्तावेजों की जांच जरूरी हो सकती है। राज्य के अनुसार रिकॉर्ड और प्रक्रिया अलग-अलग हो सकती है।

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