UP Revenue News: 7 SDM से जवाब तलब, तहसीलदारों पर भी कार्रवाई
राजस्व मामलों के धीमे निस्तारण पर शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। 7 SDM से स्पष्टीकरण मांगा गया है और कई तहसीलदारों पर निलंबन की कार्रवाई हुई है।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में जमीन-जायदाद से जुड़े राजस्व वादों के निस्तारण में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ शासन ने कड़ा रुख अपना लिया है। दाखिल-खारिज, वरासत और पैमाइश जैसे संवेदनशील मामलों को तय समयसीमा में हल न करने के चलते अब प्रशासनिक महकमे में जवाबदेही तय की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देशों के बाद राजस्व परिषद ने डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए खराब प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को चिह्नित किया है। इसी क्रम में प्रदेश के 7 उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) के न्यायालयों में मामलों के बेहद सुस्त निस्तारण को लेकर उनसे औपचारिक स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
डिजिटल समीक्षा से खुली कार्यप्रणाली

राजस्व परिषद ने आरसीसीएमएस (Revenue Court Computer Management System) पोर्टल के आंकड़ों की गहन पड़ताल के बाद यह कदम उठाया है। इस डिजिटल समीक्षा के तहत 22 दिसंबर 2025 से लेकर 31 मई 2026 तक दर्ज और निस्तारित वादों का विश्लेषण किया गया। पोर्टल के डेटा ने साफ कर दिया कि कई तहसीलों में जनता की अर्जियां लंबे समय से लंबित पड़ी रहीं और उनका समयबद्ध निस्तारण नहीं हो सका। समीक्षा के दौरान सामने आया कि कुछ अधिकारियों के न्यायालयों में काम की गति बेहद धीमी थी, जिससे आम जनता को अपनी जमीन से जुड़े छोटे-छोटे मामलों के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़े।
लखनऊ के दो एसडीएम रडार पर, सरोजनीनगर का रिकॉर्ड सबसे कमजोर

जांच के दायरे में आए अधिकारियों में राजधानी लखनऊ के दो एसडीएम शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक, लखनऊ के सरोजनीनगर न्यायालय का रिकॉर्ड सबसे कमजोर पाया गया। यहां समीक्षा अवधि के दौरान कुल 221 मामले दर्ज हुए, जिनमें से केवल 9 मामलों का ही निस्तारण किया जा सका। यहां निस्तारण की दर मात्र 4.07 प्रतिशत दर्ज की गई, जो पूरे प्रदेश में सबसे कम प्रदर्शनों में से एक है।
वहीं लखनऊ सदर तहसील के एसडीएम न्यायालय में इस दौरान 1,000 मामले आए, जिनमें से 403 मामलों का निस्तारण किया गया। यहां निस्तारण का प्रतिशत 40.30 रहा, जिसे काम के दबाव और निर्धारित मानकों के हिसाब से असंतोषजनक माना गया है।
मऊ और प्रतापगढ़ के न्यायालयों में भी सुस्त रफ्तार

राजधानी के अलावा पूर्वांचल के जिलों में भी लंबित मामलों का ग्राफ काफी ऊंचा पाया गया।
– मधुबन (मऊ): यहां एसडीएम न्यायालय में दर्ज 276 मामलों में से महज 55 मामलों का निपटारा हो सका।
– कुंडा (प्रतापगढ़): एक न्यायालय में 297 में से सिर्फ 80 मामलों का निस्तारण हुआ। वहीं कुंडा के ही एक अन्य एसडीएम न्यायालय में कुल 1,247 दर्ज मामलों में से 511 का निपटारा किया गया।
– रानीगंज (प्रतापगढ़): यहां एक एसडीएम न्यायालय में 418 वादों में से केवल 133 निस्तारित हुए, जबकि दूसरे एसडीएम न्यायालय में 558 में से महज 183 मामलों का ही समाधान निकाला गया।
23 सितंबर तक मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाएगी रिपोर्ट
शासन ने चिह्नित किए गए सभी 7 उपजिलाधिकारियों को नोटिस जारी कर तय समयसीमा में अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। इन अधिकारियों से पूछा गया है कि तय मानकों के अनुसार मामलों की सुनवाई और उनका फैसला समय पर क्यों नहीं हो सका। इन सभी के स्पष्टीकरण संकलित कर 23 सितंबर 2026 तक विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) को सौंपी जाएगी। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यदि किसी अधिकारी का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो नियमों के तहत आगे की विभागीय प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी।
तहसीलदारों पर पहले ही हो चुका है बड़ा एक्शन

एसडीएम स्तर पर जवाब-तलब से पहले शासन निचले स्तर पर बड़ी कार्रवाई कर चुका है। बीते एक सप्ताह के दौरान ही 10 तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को निलंबित किया जा चुका है, जबकि 13 अन्य अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
1 सितंबर 2026 को शासन ने कर्तव्य में लापरवाही के आरोप में 4 तहसीलदार और 1 नायब तहसीलदार को निलंबित किया था। इसके बाद मंगलवार को भी 5 तहसीलदारों को निलंबित करने का आदेश जारी किया गया। निलंबित किए गए अधिकारियों में अमित यादव (तहसीलदार, संडीला, हरदोई), कृष्ण कुमार मिश्रा (तहसीलदार, देवरिया), सौरभ कुमार (तहसीलदार, जौनपुर), रंजन वर्मा (तत्कालीन नायब तहसीलदार अयोध्या, वर्तमान तहसीलदार गाजीपुर) और अलख शुक्ला (तहसीलदार, प्रतापगढ़) शामिल हैं।
समीक्षा बैठक के बाद शुरू हुई सीधी निगरानी
इस पूरी सख्ती की नींव 29 अगस्त 2026 को हुई उच्चस्तरीय बैठक में पड़ी थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्व अदालतों में वर्षों से अटके मामलों की समीक्षा करते हुए साफ कहा था कि आम नागरिकों को वरासत, पैमाइश और दाखिल-खारिज जैसे जरूरी कामों के लिए बेवजह भटकना न पड़े। उन्होंने चेतावनी दी थी कि जनता से सीधे जुड़े मामलों में देरी और लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी। अब इसी निर्देश के तहत पूरे प्रदेश में लगातार निगरानी रखी जा रही है और प्रदर्शन के आधार पर जवाबदेही तय की जा रही है।
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