बृजभूषण परिवार की सियासी विरासत संभालेंगी बेटी शालिनी? बोलीं- पार्टी कहेगी तो लड़ूंगी चुनाव
बृजभूषण शरण सिंह की बेटी शालिनी सिंह ने सक्रिय राजनीति में उतरने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि अगर पार्टी नेतृत्व चुनाव लड़ने को कहेगा तो वह पूरी तरह तैयार हैं।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में दशकों से अपना दबदबा रखने वाले कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के परिवार से अब एक और चेहरे की चुनावी राजनीति में एंट्री की सुगबुगाहट तेज हो गई है। बृजभूषण की बेटी शालिनी सिंह ने सक्रिय राजनीति में कदम रखने की इच्छा जाहिर की है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा है कि यदि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उन्हें चुनाव लड़ने का निर्देश देता है, तो वह चुनावी मैदान में उतरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। शालिनी के इस बयान के बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
बुलंदशहर के कार्यक्रम में दिया बड़ा बयान

शालिनी सिंह सोमवार को बुलंदशहर में एक निजी कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंची थीं। इसी दौरान उन्होंने मीडिया और वहां मौजूद लोगों से बातचीत करते हुए अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और सोच को साझा किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि किसी भी व्यक्ति की पहचान केवल किसी पार्टी के सिंबल या चुनाव के टिकट से तय नहीं होती, बल्कि असली पहचान नेतृत्व क्षमता और जनता के बीच रहकर किए गए कार्यों से बनती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह किसी दल या विपक्ष को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि सीधे जनता से जुड़े जमीनी मुद्दों के आधार पर अपनी बात रखती हैं।
15 वर्षों से सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय, संगठन से भी गहरा नाता

राजनीति में कदम रखने की बात करते हुए शालिनी सिंह ने अपनी पुरानी सामाजिक पृष्ठभूमि का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वह पिछले करीब 15 वर्षों से नोएडा और आसपास के इलाकों में सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रही हैं और निरंतर लोगों के बीच काम कर रही हैं।
इसके साथ ही उनका वैचारिक और संगठनात्मक जुड़ाव भी काफी मजबूत बताया जा रहा है। शालिनी लंबे समय से राष्ट्र सेविका समिति से जुड़ी हुई हैं और उन्होंने हाल ही में संगठन का सर्वोच्च प्रशिक्षण भी पूरा किया है। जानकारों का मानना है कि संगठन से उनका यह पुराना जुड़ाव और सामाजिक सक्रियता ही उन्हें मुख्यधारा की राजनीति की ओर कदम बढ़ाने का मजबूत आधार दे रही है।
मायके से ससुराल तक, दोनों तरफ गहरा सियासी रसूख

शालिनी सिंह जिस पृष्ठभूमि से आती हैं, वहां राजनीति कोई नया विषय नहीं है। उनका मायका और ससुराल दोनों ही लंबे समय से देश और प्रदेश की राजनीति के केंद्र में रहे हैं।
शालिनी के पिता बृजभूषण शरण सिंह उत्तर प्रदेश की राजनीति का बड़ा नाम रहे हैं और कैसरगंज समेत पूर्वांचल की सीटों से छह बार लोकसभा सदस्य रह चुके हैं। उनकी मां केतकी देवी सिंह भी 1996 में गोंडा लोकसभा सीट से सांसद चुनी गई थीं। वर्तमान समय में भी परिवार का राजनीतिक दबदबा पूरी तरह कायम है। उनके बड़े भाई प्रतीक भूषण सिंह गोंडा सदर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं।
वहीं, साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बृजभूषण शरण सिंह की जगह उनके छोटे बेटे करण भूषण सिंह को कैसरगंज संसदीय सीट से टिकट दिया था। करण भूषण सिंह ने शानदार जीत दर्ज कर संसद में दस्तक दी। करण भूषण पूर्व में डबल ट्रैप निशानेबाज रह चुके हैं और वर्तमान में उत्तर प्रदेश कुश्ती संघ की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।
शालिनी का ससुराल भी राजनीतिक रसूख के मामले में पीछे नहीं है। उनकी शादी विशाल सिंह के साथ हुई है। विशाल सिंह बिहार के आरा से पूर्व सांसद रहे स्वर्गीय अजीत सिंह और पूर्व सांसद मीना सिंह के बेटे हैं। ऐसे में शालिनी दोनों परिवारों की इस मजबूत राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की दिशा में स्वाभाविक तौर पर कदम बढ़ाती दिख रही हैं।
चुनावी मैदान में उतरने की चर्चाएं तेज

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शालिनी सिंह का यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में आने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर रणनीति तैयार की जा रही है। हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर किसी सीट या औपचारिक उम्मीदवारी का दावा नहीं किया है, लेकिन जिस तरह उन्होंने शीर्ष नेतृत्व के फैसले का सम्मान करते हुए मैदान में उतरने की बात कही है, उससे संकेत साफ हैं कि वह भारतीय जनता पार्टी के मंच से अपनी सक्रिय राजनीतिक पारी की शुरुआत कर सकती हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी आलाकमान उनके इस संकेत को किस रूप में लेता है और आने वाले समय में उन्हें संगठन या सीधे चुनावी मैदान में क्या जिम्मेदारी सौंपी जाती है।
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