जालौन से बहराइच पहुंचे राजेश कुमार पांडेय 3 साल पूरे होने से पहले हुआ तबादला
जालौन के डीएम राजेश कुमार पांडेय का तीन साल पूरे होने से ठीक दो दिन पहले तबादला कर दिया गया। उन्हें बहराइच का जिलाधिकारी बनाया गया है। उनके कार्यकाल में नून नदी पुनर्जीवन और राष्ट्रीय जल पुरस्कार जैसी उपलब्धियां चर्चा में रहीं।

जालौन/उरई उत्तर प्रदेश प्रशासनिक महकमे में एक बड़ा फेरबदल हुआ है। जालौन के जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय का तबादला कर दिया गया है। शासन द्वारा जारी शासनादेश के मुताबिक, उन्हें अब सीमावर्ती जिले बहराइच की कमान सौंपी गई है। वहीं, जालौन के नए डीएम के तौर पर समीर को नियुक्त किया गया है। समीर इससे पहले उत्तर प्रदेश शासन में आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के विशेष सचिव और यूपी डेस्को (UPDESCO) के प्रबंध निदेशक के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे।
इस प्रशासनिक फेरबदल में सबसे ज्यादा चर्चा इसके वक्त को लेकर हो रही है। राजेश कुमार पांडेय ने 12 सितंबर 2023 को जालौन के जिलाधिकारी का पदभार संभाला था। 12 सितंबर 2026 को उनके कार्यकाल के सफल तीन साल पूरे होने जा रहे थे, लेकिन ठीक दो दिन पहले, यानी 10 सितंबर को शासन ने उनके तबादले का आदेश जारी कर दिया। तीन साल के इस सफर में उन्होंने जिले में कई ऐसे काम किए, जिनकी गूंज लखनऊ से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक सुनाई दी।
81 किलोमीटर लंबी मृत नून नदी को दी नई सांस

राजेश कुमार पांडेय के जालौन कार्यकाल को अगर किसी एक बड़े काम के लिए हमेशा याद रखा जाएगा, तो वह है वर्षों से सूख चुकी नून नदी का पुनर्जीवन। बुंदेलखंड की तपती धरती पर करीब 81 किलोमीटर लंबी इस मृतप्राय नदी को पुनर्जीवित करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था।
इसके लिए सबसे पहले आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए पूरी नदी का ड्रोन सर्वे कराया गया। इसके बाद एक व्यवस्थित योजना के तहत नदी की तलहटी से सिल्ट हटाने, सफाई करने और उसे गहरा व चौड़ा करने का काम युद्धस्तर पर शुरू हुआ। इस पूरे अभियान की खासियत यह रही कि इसे केवल सरकारी फाइलों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि गांव-गांव के लोगों को जोड़कर जनभागीदारी और श्रमदान का रूप दिया गया। नतीजतन, इस नदी के पुनर्जीवन से क्षेत्र के 47 गांवों के करीब 17,706 किसानों को सीधा फायदा पहुंचा और उनके खेतों तक सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी पहुंचने का रास्ता साफ हुआ।
राष्ट्रपति ने दिया ‘राष्ट्रीय जल पुरस्कार’, जिले को मिले 2 करोड़

जल संरक्षण की इसी बेजोड़ मुहिम ने जालौन का नाम पूरे देश में रोशन किया। नवंबर 2025 में नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने डीएम राजेश कुमार पांडेय को ‘राष्ट्रीय जल पुरस्कार’ से सम्मानित किया। जिले में जल संचयन और पर्यावरण संरक्षण के इस मॉडल की केंद्र स्तर पर सराहना हुई और जल संरक्षण कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए जिले को दो करोड़ रुपये की विशेष धनराशि भी प्रदान की गई।
इसके साथ ही, बुंदेलखंड में तेजी से गिरते भूजल स्तर को थामने के लिए उन्होंने किसानों के बीच फसल चक्र में बदलाव की ठोस मुहिम चलाई। मेंथा की खेती में अंधाधुंध भूजल दोहन को रोकने के लिए किसानों को जागरूक किया गया और उन्हें कम पानी में तैयार होने वाली दलहनी फसलों, विशेषकर मूंग की खेती की तरफ मोड़ा गया। इस जमीनी प्रयास का असर यह हुआ कि जिले के कई ब्लॉकों में भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया।
लापरवाही पर सख्त तेवर, 24 अफसरों की रोकी थी सैलरी

विकास और जनहित के कार्यों में जहां वे लगातार जुटे रहे, वहीं प्रशासनिक ढिलाई पर उनका रुख बेहद कड़ा रहा। सीएम डैशबोर्ड की समीक्षा और जनसुनवाई में आने वाली आम जनता की शिकायतों के निपटारे में लापरवाही बरतने वालों पर उन्होंने लगातार शिकंजा कसा।
अगस्त 2026 में ही जब जनशिकायतों के निस्तारण में भारी लापरवाही सामने आई, तो उन्होंने कड़ा कदम उठाते हुए एक साथ 24 अधिकारियों का वेतन रोक दिया था और चार उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) से सीधे स्पष्टीकरण तलब किया था। इसी तरह शासन की महत्वपूर्ण फैमिली आईडी योजना का लक्ष्य तय समय में पूरा न करने वाले करीब आधा दर्जन अफसरों के वेतन पर भी रोक लगाई गई थी। विकास योजनाओं की समीक्षा बैठकों में उनकी यह सख्ती जिले के अफसरों के बीच चर्चा का विषय बनी रहती थी।
गोशालाओं की हाईटेक निगरानी और बाढ़ प्रबंधन

पशुधन संरक्षण के मोर्चे पर भी उन्होंने नए प्रयोग किए। आवारा मवेशियों की देखभाल और गोशालाओं में व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के लिए उन्होंने जिले भर की गोशालाओं में सीसीटीवी कैमरे लगवाए। इन कैमरों की सीधी मॉनिटरिंग जिला मुख्यालय पर बने कंट्रोल रूम से की जाने लगी। गोवंश के लिए साल भर चारे का संकट न हो, इसके लिए जिले के करीब 240 हेक्टेयर चारागाह और ग्राम समाज की बंजर जमीनों पर हरा चारा उगवाने का काम कराया गया। वहीं मानसूनी सीजन में यमुना और बेतवा के तटीय इलाकों में बाढ़ की आशंका के बीच वे खुद धरातल पर उतरकर राहत और बचाव की तैयारियों पर नजर रखते रहे।
अब जब राजेश कुमार पांडेय बहराइच के नए जिलाधिकारी के रूप में नई जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं, तब जालौन की जनता उनके तीन साल के कार्यकाल को न केवल प्रशासनिक सख्ती, बल्कि बुंदेलखंड की सूखी नून नदी में फिर से पानी लौटाने वाले एक संवेदनशील प्रशासक के तौर पर भी याद रखेगी। वहीं नए जिलाधिकारी समीर के सामने जिले में चल रही इन तमाम योजनाओं को उसी रफ्तार से आगे ले जाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।
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