2027 UP चुनाव से पहले BJP का बड़ा दांव, स्मृति ईरानी बनीं राष्ट्रीय महासचिव; नितिन नबीन की नई टीम में UP को तवज्जो
2027 UP चुनाव से पहले बीजेपी का बड़ा दांव: स्मृति ईरानी बनीं राष्ट्रीय महासचिव, नितिन नवीन की नई टीम में उत्तर प्रदेश को मिली भारी तवज्जो

भारतीय जनता पार्टी ने अपने राष्ट्रीय संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का ऐलान कर दिया है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अगुवाई वाली इस नई टीम में कई कद्दावर चेहरों को अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इस पूरी संगठनात्मक सर्जरी में सबसे ज्यादा चर्चा उत्तर प्रदेश के समीकरणों और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की राष्ट्रीय स्तर पर हुई धमाकेदार वापसी की हो रही है। पार्टी हाईकमान ने साफ संकेत दे दिया है कि आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को साधने के लिए बिसात अभी से बिछाई जाने लगी है।
संगठन में स्मृति ईरानी की सबसे बड़ी वापसी

नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सूची में सबसे प्रमुख नाम पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का है, जिन्हें पार्टी ने राष्ट्रीय महासचिव (National General Secretary) की अहम जिम्मेदारी सौंपी है। इसे संगठन के भीतर उनकी सबसे मजबूत वापसी के तौर पर देखा जा रहा है। स्मृति ईरानी का सियासी सफर हमेशा से बेहद दिलचस्प रहा है:
2014 का मुकाबला: स्मृति ईरानी ने गांधी परिवार के पारंपरिक गढ़ अमेठी से राहुल गांधी को कड़ी टक्कर दी थी, हालांकि उस चुनाव में उन्हें जीत नहीं मिल पाई थी।
2019 की ऐतिहासिक जीत: स्मृति ईरानी ने 2019 के आम चुनाव में राहुल गांधी को शिकस्त देकर अमेठी में ऐतिहासिक जीत दर्ज की और केंद्र में अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।
2024 के उतार-चढ़ाव: 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के किशोरी लाल शर्मा से उन्हें अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा।
चुनाव परिणाम के बाद भले ही कुछ वक्त के लिए सियासी हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं थीं, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने एक बार फिर उनके आक्रामक तेवर, मजबूत नेतृत्व क्षमता और सांगठनिक अनुभव पर पूरा भरोसा जताया है। राष्ट्रीय महासचिव के तौर पर उन्हें अब देश भर के संगठनात्मक कार्यों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की रणनीति में भी केंद्रीय भूमिका निभानी होगी।
उत्तर प्रदेश के जातीय और क्षेत्रीय संतुलन पर विशेष फोकस

नितिन नवीन की नई टीम में उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों का खास ख्याल रखा गया है। राज्य से कई अन्य प्रमुख नेताओं को भी शीर्ष पदों पर बनाए रखा गया है और नई जिम्मेदारियां बांटी गई हैं:
प्रोफेसर तारिक मंसूर (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष): अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के पूर्व कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद पर बरकरार रखा गया है। वह राष्ट्रीय कार्यकारिणी में इकलौते मुस्लिम चेहरे के तौर पर शामिल हैं।
रेखा वर्मा (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष): धौरहरा से पूर्व सांसद रेखा वर्मा को भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी पर कायम रखा गया है। 2024 के चुनाव में सपा के आनंद भदौरिया से मिली हार के बावजूद पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है। उनके कुर्मी समुदाय से आने के कारण यह फैसला अहम सामाजिक संतुलन साधने की दृष्टि से देखा जा रहा है।
हरीश द्विवेदी (राष्ट्रीय महासचिव): पूर्वांचल के मजबूत चेहरे हरीश द्विवेदी को संगठन में राष्ट्रीय महासचिव का दायित्व सौंपा गया है।
संगीता यादव (राष्ट्रीय सचिव): उत्तर प्रदेश से महिला और युवा नेतृत्व को साधते हुए संगीता यादव को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है।डॉ. भोला सिंह (राष्ट्रीय सचिव): बुलंदशहर/कानपुर देहात क्षेत्र से सांसद डॉ. भोला सिंह को भी राष्ट्रीय सचिव पद की जिम्मेदारी दी गई है।
2027 के महामुकाबले की तैयारी
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस नई टीम के जरिए बीजेपी ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। एक तरफ जहां हारने वाले मजबूत नेताओं के अनुभव को संगठन में ताकत दी गई है, वहीं दूसरी तरफ सभी जातियों, वर्गों और क्षेत्रों को संतुलित प्रतिनिधित्व देकर यह संदेश दे दिया गया है कि संगठन पूरी मजबूती के साथ आगामी राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए मैदान में उतर चुका है।
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